रानी कुमारी का कहना है कि उसने कुंदन से प्यार करके शादी की थी। तीन साल तक एक-दूसरे को समझने के बाद कोर्ट मैरिज की और इस रिश्ते से तीन बच्चे भी हुए। लेकिन समय के साथ रिश्ते में तनाव बढ़ता गया। आए दिन के झगड़ों और घुटन भरे माहौल से परेशान होकर वह मानसिक रूप से टूटने लगी। इसी दौरान फुफेरे भाई गोविंद से बातचीत शुरू हुई, जिससे उसे सुकून महसूस होने लगा।
उसकी शादी गोविंद से नहीं करवाई गई तो
वहीं, कुंदन कुमार का दर्द भी कम नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार बच्चों का हवाला देकर रिश्ता बचाने की कोशिश की, लेकिन रानी साथ रहने को तैयार नहीं थी। वह कई बार बिना बताए घर छोड़कर चली जाती थी। कुंदन के अनुसार, रानी ने साफ कह दिया था कि अगर उसकी शादी गोविंद से नहीं करवाई गई तो वह या तो उसे मार देगी या खुद आत्महत्या कर लेगी।
व्यक्तिगत आजादी को लेकर नई बहस
कुंदन ने बताया कि इसी डर और हालात को देखते हुए उन्होंने जबरदस्ती रिश्ता निभाने के बजाय उसे आजाद करना बेहतर समझा। तलाक के बाद भी उन्होंने कोई दुश्मनी नहीं रखी और खुद कोर्ट में गवाह बनकर रानी और गोविंद की शादी करवाई। कुंदन का कहना है कि अगर रानी कहीं और खुश रह सकती है, तो उसे रोकना गलत है। यह मामला समाज में रिश्तों, मानसिक तनाव और व्यक्तिगत आजादी को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।