Prayagraj: संगम नगरी प्रयागराज में आज मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भक्ति और आध्यात्मिकता का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे की चादर को चीरते हुए, देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र त्रिवेणी संगम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर आस्था की डुबकी लगाई।
मुख्य आकर्षण, ड्रोन की नजर से मिनी इंडिया
आसमान से ड्रोन कैमरों द्वारा कैद किए गए दृश्यों ने संगम तट की भव्यता में चार चांद लगा दिए। ऊपर से देखने पर रेतीला तट केवल सिरों के समंदर की तरह नजर आ रहा था। रंग-बिरंगे परिधान पहने श्रद्धालुओं की लंबी कतारें और चारों ओर गूंजते हर-हर गंगे के उद्घोष ने वातावरण को पूरी तरह से शिवमय और आध्यात्मिक बना दिया। विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह दृश्य किसी अजूबे से कम नहीं था, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने आए थे।
धार्मिक महत्व और परंपरा
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायण होने पर संगम में स्नान करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। ब्रह्ममुहूर्त से ही शुरू हुआ स्नान का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। साधु-संतों से लेकर आम जनमानस तक, हर कोई इस आध्यात्मिक ऊर्जा का हिस्सा बनने के लिए आतुर दिखा।
प्रशासन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। घाटों पर जल पुलिस, गोताखोर और सुरक्षा बल तैनात रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम, चिकित्सा शिविर और सुचारू यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की गई थी, ताकि इतनी बड़ी संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
मकर संक्रांति का यह पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की एकता और अखंडता का जीवंत उदाहरण पेश करता है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के लोग एक ही जलधारा में डुबकी लगाकर यह संदेश देते हैं कि विविधताओं के बावजूद भारत की आत्मा एक है।