Jharkhand News: रांची में प्रवर्तन निदेशालय कार्यालय की सुरक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. ED की याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय परिसर में किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने की स्थिति में रांची के एसएसपी को जिम्मेवार माना जाएगा. मामले में आगे की सुनवाई के लिए 9 फरवरी की तारीख तय की गई है.
प्रारंभिक स्तर पर अंतरिम सुरक्षा में कोर्ट की सतर्कता
न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने अपने आदेश में कहा है कि प्राथमिकी के शुरुआती चरण में हाईकोर्ट आम तौर पर अंतरिम सुरक्षा देने में धीमी रहती है. हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट मूकदर्शक नहीं रह सकता. न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर कोई अंतिम निष्कर्ष दूसरे पक्ष का जवाब आने के बाद ही निकाला जाएगा.
सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश
कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल को निर्देश दिया कि वे सरकार से अनुमति लेकर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें.
ED अधिकारियों को वैधानिक सुरक्षा का उल्लेख
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में नेक नीयत से काम करने वाले सरकारी अधिकारियों को PMLA की धारा 67 के तहत सुरक्षा देने का प्रावधान है. कोर्ट ने ED कार्यालय की सुरक्षा के लिए BSF/CISF या अन्य अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती का निर्देश दिया.
केंद्र और राज्य को दिए गए स्पष्ट निर्देश
केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित ASGI प्रशांत पल्लव को निर्देश दिया गया कि वे ED कार्यालय की सुरक्षा से संबंधित आदेश की जानकारी केंद्रीय गृह सचिव को आज ही दें. वहीं रांची के एसएसपी को सीधे तौर पर ED कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि कार्यालय परिसर में लगे सभी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए.
सुनवाई के दौरान ED का पक्ष
याचिका पर सुनवाई के दौरान ED की ओर से अधिवक्ता अमित दास ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी फिलहाल अति संवेदनशील मामलों की जांच कर रही है. इन मामलों में सरकार के मंत्री आईएएस अधिकारी और अन्य प्रभावशाली लोग शामिल हैं.
एयरपोर्ट थाना की शिकायत और पूरा घटनाक्रम
एयरपोर्ट थाना में ED अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाला संतोष कुमार पेयजल घोटाले का मुख्य अभियुक्त है. आरोप है कि उसने अन्य लोगों के साथ साजिश कर सरकारी खजाने से 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की. बताया गया कि वह 12 जनवरी को स्वयं पूछताछ के लिए ED कार्यालय आया था. पूछताछ के दौरान जब उससे गड़बड़ियों को लेकर सवाल किए गए तो वह उत्तेजित हो गया और पानी के जग से अपने सिर पर वार कर लिया, जिससे उसे चोट आई.
हाईकोर्ट का यह आदेश ED कार्यालय की सुरक्षा और जांच एजेंसियों के कामकाज को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है. कोर्ट ने स्पष्ट जिम्मेवारी तय कर यह संदेश दिया है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के काम में किसी भी तरह की बाधा या असुरक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा. साथ ही अंतिम निष्कर्ष से पहले सभी पक्षों को सुनने की न्यायिक प्रक्रिया को भी संतुलित रूप से आगे बढ़ाया गया है.