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  • 2026-01-18

Jamshedpur Police Negligence : गोलमुरी पुलिस लाइन में धूल फांक रही मॉडिफाइड बाइक, शहर में अपराध बेलगाम, क्या सिर्फ दिखावा बनकर रह गई पुलिस की सुरक्षा तैयारी?

Jamshedpur : शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस ने बड़े स्तर पर मॉडिफाइड बाइक को अपने बेड़े में शामिल किया था। गुरुवार को एसएसपी पीयूष पांडेय ने टाइगर मोबाइल के जवानों को कुल 70 मॉडिफाइड बाइक सौंपी थीं। इन बाइकों के साथ जवानों को हेलमेट भी उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस का दावा था कि इन अत्याधुनिक बाइकों की मदद से गश्त और अधिक प्रभावी होगी तथा जवान कम से कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकेंगे।


इन बाइकों को विशेष रूप से पुलिस की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। इनमें सायरन, हाईटेक लाइट और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मौजूदगी तुरंत दर्ज हो सके। तेज गति और सुविधाजनक डिजाइन के कारण इन बाइकों को अपराध नियंत्रण और विधि व्यवस्था बनाए रखने में बेहद कारगर बताया गया था।


बाइक वितरण के दौरान एसएसपी पीयूष पांडेय ने टाइगर मोबाइल के जवानों से संवाद भी किया और उन्हें सतर्कता व जिम्मेदारी के साथ ड्यूटी निभाने की हिदायत दी थी। उन्होंने कहा था कि इन बाइकों से पुलिस गश्त की रफ्तार बढ़ेगी और अपराधियों में पुलिस की मौजूदगी का दबाव बनेगा।

लेकिन हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। इन मॉडिफाइड बाइकों की बड़ी संख्या फिलहाल गोलमुरी पुलिस लाइन में खड़ी-खड़ी धूल फांक रही है। दर्जन भर से ज्यादा बाइक सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। न तो इनकी नियमित गश्त में तैनाती हो रही है और न ही इनके रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था दिखाई दे रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस के पास बाइक चलाने वाले प्रशिक्षित जवानों की कमी है, या फिर यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है।

इधर शहर में अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। हाल ही में हुए कैरव गांधी लापता मामला समेत हत्या, फायरिंग और चोरी जैसी घटनाओं ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों में दहशत का माहौल है और पुलिस की कार्यशैली पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि इन मॉडिफाइड बाइकों का सही और नियमित इस्तेमाल किया जाता, तो अपराध की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता था। तेज गश्त और त्वरित पुलिस कार्रवाई से अपराधियों के हौसले जरूर पस्त होते।

यह भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या ये अत्याधुनिक मॉडिफाइड बाइक वास्तव में नियमित गश्त, रात्रि पेट्रोलिंग और अपराध नियंत्रण के लिए खरीदी गई थीं, या फिर इनका उपयोग केवल विशिष्ट अवसरों एवं माननीयों के कारकेड तक ही सीमित रह गया है। बीते दिनों राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के दौरान ऐसी ही मॉडिफाइड बाइक सड़कों पर पूरी मुस्तैदी के साथ दौड़ती नजर आई थीं, लेकिन आम दिनों में शहर की सुरक्षा व्यवस्था, विशेषकर रात्रि गश्त में इनकी अनुपस्थिति कई संदेह खड़े कर रही है। जब शहर में लगातार हत्या, चोरी, छिनतई, फायरिंग और मादक पदार्थों के अवैध नेटवर्क से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही हैं, ऐसे में सवाल यह है कि क्या पुलिस संसाधनों का प्राथमिक उपयोग जनता की सुरक्षा के बजाय केवल वीआईपी ड्यूटी तक सीमित होकर रह गया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते अपराध के बीच क्या पुलिस इन संसाधनों का सही इस्तेमाल करेगी, या फिर करोड़ों की लागत से खरीदी गई ये मॉडिफाइड बाइक यूं ही पुलिस लाइन की शोभा बढ़ाती रहेंगी। शहरवासियों की नजरें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं, जो जवाब और ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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