Jharkhand News: झारखंड ने बिजली के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह खबर ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी है. राज्य अब अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर रहा है और लगभग 500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली राष्ट्रीय ग्रिड को बेचने की स्थिति में पहुंच गया है.
बिजली संकट से आत्मनिर्भरता तक का सफर
कभी लगातार कटौती और बिजली संकट से जूझने वाला झारखंड अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक मोड़ पर है. बीते कुछ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में हुए निवेश और नीतिगत फैसलों का असर अब जमीन पर दिख रहा है. राज्य को अब पीक डिमांड के समय भी बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है.
मांग और आपूर्ति का मौजूदा संतुलन
फिलहाल झारखंड में औसत बिजली मांग करीब 2500 से 2882 मेगावाट के बीच बनी हुई है. आने वाले वर्षों में इसके 3500 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है. पहले इस मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय ग्रिड और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती थी. स्थानीय उत्पादन बढ़ने से यह निर्भरता अब तेजी से घट रही है.
पतरातू परियोजना बनी आत्मनिर्भरता की रीढ़
राज्य की ऊर्जा क्षमता को मजबूती देने में पतरातू सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की अहम भूमिका है. पीवीयूएनएल के तहत स्थापित इस परियोजना की पहली यूनिट से 800 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो चुका है. इसमें से करीब 680 मेगावाट झारखंड को मिल रही है.
भविष्य की बड़ी उत्पादन योजना
पतरातू सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के तहत कुल पांच यूनिटों से 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना है. पहले चरण में तीन यूनिटों से 2400 मेगावाट बिजली उपलब्ध होगी. कुल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा झारखंड को मिलेगा. इसके बाद राज्य के पास अपनी जरूरत से अधिक बिजली उपलब्ध रहेगी.
अन्य स्रोतों से भी बढ़ी क्षमता
तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट से करीब 380 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है. वहीं गेतलसूद डैम पर 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट हरित ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है. इन परियोजनाओं से राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिली है.
ट्रांसमिशन और वितरण पर बड़ा फोकस
उत्पादन के साथ साथ ट्रांसमिशन और वितरण ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है. 22694 करोड़ की लागत से शहरी क्षेत्रों में भूमिगत केबलिंग और ग्रामीण नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है. रांची देवघर जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में हाई वोल्टेज लाइनें भूमिगत होंगी.
धनबाद बोकारो क्षेत्र में नई परियोजनाएं
धनबाद बोकारो क्षेत्र में 1707 करोड़ की लागत से 15 नई ट्रांसमिशन परियोजनाएं शुरू की गई हैं. इनमें 220 केवी और 132 केवी लाइनें और आधुनिक जीआइएस सब स्टेशन शामिल हैं. इससे बिजली आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी.
बिजली क्षेत्र में बदली तस्वीर
राज्य में उपभोक्ताओं की संख्या 6.29 लाख से बढ़कर 54.24 लाख हो चुकी है. विद्युतीकृत गांवों की संख्या 6483 से बढ़कर 32497 हो गई है. ग्रामीण घरेलू कनेक्शन 1.87 लाख से बढ़कर 39.47 लाख तक पहुंच चुके हैं. मांग 795 मेगावाट से बढ़कर 2882 मेगावाट हो गई है. शहरी क्षेत्रों में औसतन 22 और ग्रामीण क्षेत्रों में 21 घंटे बिजली आपूर्ति सामान्य हो चुकी है.
झारखंड का बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर होना राज्य की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कदम है. अतिरिक्त बिजली राष्ट्रीय ग्रिड को देने से न केवल राजस्व के नए अवसर बनेंगे बल्कि देश के अन्य राज्यों की ऊर्जा जरूरतों में भी सहयोग मिलेगा. मजबूत उत्पादन और आधुनिक ट्रांसमिशन ढांचा आने वाले वर्षों में झारखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा कर सकता है.