Jharkhand News: रांची पुलिस ने बच्चों के अपहरण और तस्करी से जुड़े एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. इस कार्रवाई में कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और अलग अलग इलाकों से 12 बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विरोधी खेरवार, एंथोनी खेरवार, प्रमोद कुमार, आशिक गोप, राज रवानी, नव खेरवार, सोनी कुमारी, चांदनी देवी, सीता देवी, दिनू भुइयां, संन्यासी खेरवार, मालिन देवी, बेबी देवी, सोनिया देवी और उपैया खेरवार शामिल हैं.
एसआईटी की कार्रवाई में टूटा गिरोह
यह पूरी कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, डीजीपी तदाशा मिश्रा और सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम ने की. एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में एसआईटी ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई. रविवार को एसएसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी.
रामगढ़ से मिली पहली बड़ी कड़ी
मामले की शुरुआत एक बच्चे के अपहरण की जांच से हुई थी. तलाश के दौरान पुलिस को रामगढ़ जिले से अहम सुराग मिले. यहां से दो मुख्य आरोपी नव खेरवार और सोनी कुमारी को गिरफ्तार किया गया. पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान दोनों ने कबूल किया कि वे एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं, जिसके तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं.
भीख और देह व्यापार में झोंके जाते थे बच्चे
पुलिस जांच और आरोपियों के बयान से सामने आया है कि यह गिरोह झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी सक्रिय था. गिरोह के पुरुष और महिला सदस्य बच्चों को अगवा कर सार्वजनिक स्थानों पर भीख मंगवाने, दूसरे राज्यों में बेचने और देह व्यापार व मानव तस्करी में इस्तेमाल करते थे. बरामद बच्चों के बयान ने इन दावों की पुष्टि की है.
तीन जिलों से 12 बच्चों की बरामदगी
एसआईटी ने छापेमारी कर रांची के सिल्ली क्षेत्र, रामगढ़ के कोठार और लातेहार के बरियातू इलाके से कुल 12 बच्चों को मुक्त कराया. इनमें खादगढ़ा बस स्टैंड से दो साल पहले अपहृत एक बच्ची, ओडिशा के संबलपुर रेलवे स्टेशन से तीन साल पहले अगवा की गई बच्ची, बरियातू से अपहृत पांच बच्चियां, धनबाद से दो बच्चियां, लोहरदगा से एक बच्ची और रांची के जगन्नाथपुर से एक साल पहले अपहृत बच्ची शामिल हैं.
बिहार और बंगाल तक फैला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया है कि कुछ बच्चों को बिहार के औरंगाबाद और पश्चिम बंगाल के अलग अलग इलाकों में बेच दिया गया था. पुलिस उन बच्चों की पहचान और बरामदगी के लिए संबंधित राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है.
आगे और खुलासों की संभावना
एसएसपी राकेश रंजन के अनुसार यह नेटवर्क काफी विफैलास्तृत है और इसमें और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है. एसआईटी की छापेमारी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बच्चा तस्करी जैसे संगठित अपराध राज्य और सीमाओं से परे फैल चुके हैं. रांची पुलिस की यह सफलता न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम है, बल्कि उन बच्चों के लिए भी नई जिंदगी की शुरुआत है, जिन्हें वर्षों से अमानवीय हालात में रखा गया था.