Seraikela Breaking: सरायकेला थाना अंतर्गत कोलाबेरा स्थित रामाकृष्णा प्लांट-5 में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब भोलाडीह गांव के ग्रामीण कंपनी प्रबंधन के खिलाफ सड़क पर उतर आए. मामला कई वर्ष पूर्व जमीन देने के बदले रोजगार देने के वादे से जुड़ा है. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने समझौते के अनुसार नौकरी नहीं दी, जिससे उनका गुस्सा फूट पड़ा.
जमीन के बदले नौकरी का था समझौता
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई साल पहले अपनी जमीन कंपनी को दी थी. उस समय कंपनी प्रबंधन की ओर से यह आश्वासन दिया गया था कि योग्यता के आधार पर 40 लोगों को नौकरी दी जाएगी. लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद अब तक केवल 21 लोगों को ही रोजगार मिला है. बाकी लोगों को लगातार आश्वासन देकर टाल दिया गया.
कंपनी अधिकारी पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने कंपनी के अधिकारी सेनपति पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि जब भी वे बचे हुए लोगों को नौकरी देने की मांग को लेकर कंपनी जाते हैं, तो अधिकारी उन्हें डरा धमका कर भगा देते हैं. इससे ग्रामीणों में असंतोष और बढ़ गया है.
कर्मचारियों से भरी बस को रोका
आक्रोशित ग्रामीणों ने कंपनी की एक बस को सड़क पर रोक दिया. इस बस में 100 से अधिक कंपनी कर्मी सवार थे. बस कई घंटों से एक ही स्थान पर खड़ी है. विरोध के कारण सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई है और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है.
पुलिस की समझाइश बेअसर
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया. हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सड़क से हटने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक और अधिकार नहीं मिलेगा, वे आंदोलन जारी रखेंगे.
शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत
स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है. ग्रामीण चाहते हैं कि कंपनी प्रबंधन बातचीत के जरिए उनकी मांगों का समाधान करे, ताकि तनावपूर्ण माहौल को शांत किया जा सके.
ग्रामीणों की जायज मांगों का समाधान निकालना जरुरी
यह मामला उद्योग और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विश्वास और समझौते के पालन से जुड़ा है. यदि समय रहते संवाद और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए ग्रामीणों की जायज मांगों का समाधान निकाला जाए.