इससे पहले अदालत ने दोनों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। सजा के बिंदु पर आज यानी 27 जनवरी को फैसला सुनाया गया, जिसमें अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोनों को उम्रकैद की सजा दी।
हालांकि, इस फैसले में अभियोजन पक्ष को आंशिक झटका भी लगा। हत्या में शामिल माने जा रहे अन्य छह आरोपी, मंगल टुडू, चित्रो सरदार, मिथुन चक्रवर्ती, डोमनिक सैमसंग, मोहन कच्छप और सरफुद्दीन अंसारी को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। गवाहों के मुकरने और ठोस प्रमाण प्रस्तुत न हो पाने के कारण इन आरोपियों को संदेह का लाभ मिला।
मामले की पृष्ठभूमि 12 मई 2016 की है। उस दिन जमीन कारोबारी संजीव सिंह अपनी बाइक से सरजामदा से टेल्को स्थित अपने घर लौट रहे थे। सुबह करीब 10:45 बजे जैसे ही वे गोविंदपुर थाना क्षेत्र के जोजोबेड़ा रेलवे फाटक के पास पहुंचे, पहले से घात लगाए बाइक सवार अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। घटनास्थल पर ही संजीव सिंह की मौत हो गई थी। इस निर्मम हत्याकांड से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि हत्या की साजिश राजनीतिक रंजिश और जमीन कारोबार से जुड़े विवाद के चलते रची गई थी। दुबराज नाग पर इस हत्याकांड की साजिश रचने का मुख्य आरोप था। वहीं, मृतक के चचेरे भाई जितेंद्र सिंह की भूमिका ने सभी को चौंका दिया था, जिसने अपने ही भाई की गतिविधियों की जानकारी देकर हत्या का रास्ता साफ किया।
अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष दुबराज नाग और जितेंद्र सिंह के खिलाफ मजबूत साक्ष्य पेश करने में सफल रहा, जिसके आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया। करीब दस साल बाद आए इस फैसले को संजीव सिंह के परिजनों और आम लोगों ने न्याय की बड़ी जीत बताया है।