Jharkhand Politics: झारखंड प्रदेश कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान और असंतोष की गूंज अब सीधे दिल्ली तक पहुंच गई है. हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों और पार्टी के प्रमुख चेहरों को एक साथ राजधानी बुलाया गया है. बुधवार शाम नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन नेताओं से आमने-सामने बातचीत करेंगे. इस बैठक को झारखंड कांग्रेस के मौजूदा हालात के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
राहुल गांधी की बैठक पर टिकी सबकी निगाहें
पार्टी के भीतर बीते कुछ समय से असंतोष और संगठनात्मक सुस्ती को लेकर सवाल उठते रहे हैं. विधायकों की नाराजगी से लेकर आपसी तालमेल की कमी तक की शिकायतें लगातार सामने आई हैं. ऐसे माहौल में राहुल गांधी का सीधे संवाद करना यह संकेत देता है कि आलाकमान अब स्थिति को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.
किन नेताओं को दिल्ली बुलाया गया
दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक के लिए कांग्रेस कोटे के चारों मंत्री राधाकृष्ण किशोर, डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की को तलब किया गया है. इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष, विधायक दल के नेता और पार्टी के दोनों सांसद सुखदेव भगत तथा कालीचरण मुंडा भी बैठक में मौजूद रहेंगे.
अनुभव और संतुलन पर फोकस
बैठक में दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बालमुचू और राजेश ठाकुर को भी बुलाया गया है. संगठन के लंबे अनुभव रखने वाले इन नेताओं की मौजूदगी इस ओर इशारा करती है कि राहुल गांधी केवल औपचारिक चर्चा नहीं बल्कि जमीनी हकीकत को समझना चाहते हैं. पुराने नेताओं से मिलने वाले फीडबैक को अहम माना जा रहा है.
मंत्रियों के कामकाज की होगी समीक्षा
सूत्रों के अनुसार बैठक में मंत्रियों के परफॉर्मेंस पर खुलकर बात हो सकती है. विभागीय कामकाज, जनता के बीच छवि और संगठन के साथ समन्वय जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे. हाल के दिनों में कुछ मंत्रियों को लेकर विधायकों की शिकायतें दिल्ली तक पहुंची हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ी है.
संगठन की कमजोरियों पर सीधी चर्चा
बैठक का दूसरा बड़ा एजेंडा संगठन की हालत है. जिला और प्रखंड स्तर पर निष्क्रियता, गुटबाजी और समन्वय की कमी को लेकर राहुल गांधी प्रदेश नेतृत्व से सीधे सवाल जवाब कर सकते हैं. माना जा रहा है कि संगठन को मजबूत करने के लिए ठोस दिशा निर्देश भी दिए जा सकते हैं.
सांसदों से जमीनी फीडबैक की उम्मीद
दोनों सांसद इस बैठक में जनता के मूड और जमीनी हालात से राहुल गांधी को अवगत करा सकते हैं. वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अपने अनुभव के आधार पर संगठन के भीतर चल रही खींचतान की तस्वीर सामने रख सकते हैं. इससे आलाकमान को पूरी स्थिति समझने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली में होने वाली यह बैठक झारखंड कांग्रेस के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है. यदि राहुल गांधी सख्त रुख अपनाते हैं तो असंतोष और खुलकर सामने आ सकता है. वहीं संतुलित फैसले और स्पष्ट रोडमैप संगठन में नई ऊर्जा भर सकता है. अब देखना यह है कि यह मंथन संकट को और गहराता है या कांग्रेस के लिए समाधान का रास्ता खोलता है.