Jharkhand News: लोकसभा में बजट 2026 पेश होते ही देशभर में इसकी समीक्षा शुरू हो गई है. झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर साल बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जब तक वे जमीन पर दिखाई नहीं देते, तब तक उन्हें सार्थक नहीं माना जा सकता.
झारखंड के साथ भेदभाव का आरोप
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों से झारखंड जैसे राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. राज्य का पैसा रोका जाना, बकाया राशि समय पर न मिलना और विकास योजनाओं में अनावश्यक अड़चनें डालना पहले भी सामने आ चुका है. उनके अनुसार बीते छह सालों में यह स्थिति बार-बार दोहराई गई है, जिससे राज्य की प्रगति प्रभावित हुई है.
टैक्स और रोजगार पर उठे सवाल
मंत्री ने बजट में मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए ठोस राहत न होने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इससे आम लोगों को कोई सीधी राहत नहीं मिलेगी. साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कैसे पैदा करेगी.
दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि मजदूरों के अधिकार लगातार कमजोर किए जा रहे हैं और महिलाओं के लिए भी कोई प्रभावी और नई पहल बजट में नजर नहीं आई. उनके अनुसार सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है.
सरकार के दावों और जमीनी सच्चाई में अंतर
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आम आदमी, गरीब और किसानों के लिए कई घोषणाएं करती है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि वे योजनाएं कितनी तेजी से और ईमानदारी से लागू होती हैं. जब तक बदलाव आम जीवन में महसूस नहीं होगा, तब तक ऐसे दावे अधूरे ही रहेंगे.
यह बयान एक बार फिर उस बहस को तेज करता है कि बजट की सफलता सिर्फ घोषणाओं से नहीं बल्कि उनके क्रियान्वयन से तय होती है. यदि राज्यों को उनका हक समय पर नहीं मिला और रोजगार के ठोस अवसर नहीं बने, तो केंद्र और राज्यों के बीच भरोसे की दूरी और बढ़ सकती है.