Chaibasa News: चाईबासा जिले के स्वास्थ्य विभाग का एक और लापरवाही भरा मामला सामने आया है. इस बार जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्चा में है, जहां उपायुक्त के आदेशों की अनदेखी करते हुए पिछले दो दिनों से डॉक्टर नदारद रहे और मरीज इलाज के लिए भटकते रहे.
जगन्नाथपुर के शिव मंदिर टोला निवासी श्याम करुवा का दस वर्षीय पुत्र सम्राट करुवा सोमवार सुबह छत पर पतंग उड़ाने के दौरान संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गया. हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे तत्काल इलाज की जरूरत थी.
डॉक्टर नहीं मिले, अस्पताल में तड़पता रहा बच्चा
परिजन घायल सम्राट को जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां काफी देर तक कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. इलाज न मिलने के कारण बच्चा अस्पताल में ही तड़पता रहा. अंत में परिजन उसे निजी वाहन से 18 किलोमीटर दूर टाटा स्टील के नोवामुंडी अस्पताल ले गए, जहां उसका इलाज कराया गया.
दूसरी घटना से भी खुली पोल
इसी दौरान बीच कोचड़ा गांव की एक सहिया मोटरसाइकिल से गिरकर घायल हो गई. उसे भी जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, लेकिन डॉक्टर के अभाव में फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों ने उसका प्राथमिक उपचार किया. रेफर करने के लिए भी कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था, जिससे वह काफी देर तक दर्द में पड़ी रही.
प्रशासन को दी गई सूचना
दोनों घटनाओं के बाद मामले की जानकारी अनुमंडल पदाधिकारी महेंद्र छोटन को दी गई. उनके निर्देश पर अंचल अधिकारी मनोज मिश्रा ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया.
मौके पर सभी डॉक्टर अनुपस्थित
अंचल अधिकारी के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं मिला. चिकित्सा प्रभारी जयंत कुमार से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वह पांच दिन की छुट्टी पर हैं. वहीं डॉ. बृजमोहन हेस्सा का स्थानांतरण मझगांव हो चुका है. डेंटल डॉक्टर प्रतिभा कुमारी सप्ताह में केवल तीन दिन आती हैं और आयुष डॉक्टर इकबाल उस समय फील्ड में निकले हुए थे.
जिम्मेदारी तय करने की मांग
इतने बड़े स्वास्थ्य केंद्र में एक भी डॉक्टर का मौजूद न होना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है. सवाल उठ रहा है कि यदि चिकित्सा प्रभारी छुट्टी पर थे तो सिविल सर्जन द्वारा किसी अन्य डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति क्यों नहीं की गई. यदि की गई थी तो मौके पर कोई डॉक्टर क्यों नहीं था. अब यह जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच का विषय बन गया है.
स्थानीय लोगों का आक्रोश
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में तत्काल डॉक्टरों की तैनाती की जाए ताकि आम जनता को समय पर इलाज मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों.
डीसी के आदेश की अवहेलना
पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त चंदन कुमार ने नगर परिषद चुनाव और मैट्रिक-इंटर परीक्षा को देखते हुए सभी विभागों में छुट्टियां रद्द कर दी थीं. इसके बावजूद जगन्नाथपुर स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी जयंत कुमार बिना लिखित आवेदन के मौखिक रूप से छुट्टी पर चले गए, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
सदर अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. भारती गोरेती मिंज ने बताया कि उपायुक्त के आदेश के बावजूद छुट्टी पर जाने के मामले में चिकित्सा प्रभारी जयंत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा. इसके बाद जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
यह घटना झारखंड की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोर स्थिति को उजागर करती है. डॉक्टरों की अनुपस्थिति और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है. यदि समय रहते जिम्मेदारी तय कर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी और जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठता चला जाएगा.