सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा की मांग
वर्ष 2005 में हुए लीज नवीनीकरण के दौरान रैयतों और विस्थापितों को न्याय नहीं मिला. मंच ने 2005 के लीज नवीनीकरण की जिला स्तर पर पुनः समीक्षा और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. साथ ही जिन रैयतों की भूमि लीज प्रक्रिया में छूट गई या जानबूझकर शामिल नहीं की गई, उनकी जमीन मूल रैयतों को वापस करने की मांग उठाई गई है.
मंच ने आरोप लगाया है कि बिना विधिवत लीज या अधिग्रहण के कई जमीनों पर कब्जा किया गया है. ऐसी भूमि की पहचान कर उन्हें मूल रैयतों को लौटाने तथा अवैध कब्जों पर CNT/SPT अधिनियम और भूमि सुधार कानून के तहत कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है.
ज्ञापन में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के पुराने तालाब, जलस्रोत और गैर- मजरुआ जमीन को ग्रामसभा के हवाले करने तथा निजी और कॉरपोरेट कब्जा समाप्त करने की मांग भी की गई है. मंच ने कहा है कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की लिखित सहमति के बिना किसी भी भूमि संबंधी निर्णय पर रोक लगाई जाए.
प्राथमिकता देने की मांग उठाई
लीज नवीनीकरण प्रक्रिया में विस्थापितों और रैयत प्रतिनिधियों को शामिल करने, भूमि उपयोग और लीज से जुड़ी सभी जानकारियों को सार्वजनिक करने तथा टाटा कंपनी के पास उपलब्ध कुल लीज भूमि, उपयोग की गई भूमि और अवैध कब्जे की सूची सार्वजनिक करने की मांग की गई है. इसके अलावा प्रभावित रैयतों और विस्थापितों के पुनर्वास, रोजगार और आजीविका सुनिश्चित करने, जिला स्तरीय निगरानी समिति के गठन, विस्थापित प्रमाण पत्र जारी करने तथा टाटा स्टील की बहाली प्रक्रिया में स्थानीय रैयतों और टाटा विस्थापितों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई गई है.
मंच ने जिला प्रशासन से मूल रैयत खतियानधारियों की जांच के लिए समिति गठित करने की भी मांग की है. ज्ञापन के साथ रैयतों की दूसरी सूची भी संलग्न की गई है. मूलवासी अधिकार मंच ने उपायुक्त से सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि रैयतों, मूल निवासियों और विस्थापितों को उनका संवैधानिक और वैधानिक अधिकार मिल सके.