Delhi: भारत में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के मामलों पर केंद्र सरकार ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। दिल्ली में सीबीआई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “Tackling Cyber-Enabled Frauds & Dismantling the Ecosystem” को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर सुरक्षा अब केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है।
तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर
अमित शाह ने कहा कि जिस तरह अपराधी नई तकनीक का सहारा ले रहे हैं, उसी तरह हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी एक कदम आगे रहना होगा। उन्होंने Next-Gen Policing की वकालत करते हुए कहा कि अब पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीक-आधारित जांच समय की मांग है।
बयान के मुख्य बिंदु
गृह मंत्री ने केवल अपराधियों को पकड़ने के बजाय उस पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करने पर जोर दिया, जो साइबर ठगी को बढ़ावा देता है। उन्होंने सीबीआई और अन्य राज्य पुलिस बलों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई ताकि डेटा और सूचनाओं का आदान-प्रदान रियल-टाइम में हो सके। साइबर हमलों को देश की सीमाओं पर होने वाले हमलों की तरह ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि ये देश की अर्थव्यवस्था और डेटा सुरक्षा को अस्थिर कर सकते हैं।
आगे की राह
गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और अन्य संस्थाएं मिलकर एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार करेंगी, जिससे आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें। उन्होंने राज्यों से भी अपील की कि वे अपने साइबर सेल को और अधिक आधुनिक और संसाधन संपन्न बनाएं।