Jharkhand News: खूंटी जिले के तोरपा थाना अंतर्गत चकला मोड़ के पास रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में रांची के दो पादरियों की जान चली गई. अनियंत्रित होकर एक एसयूवी पेड़ से जा टकराई, जिससे वाहन में सवार दोनों व्यक्तियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से शवों को क्षतिग्रस्त वाहन से बाहर निकाला.
पिकनिक से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, कपूचीन सोसाइटी रांची के चेयरमैन फादर ग्रेगोरी बिलुंग और विधा सदन सामलौंग के फादर स्टेनिसलास कुजूर सोसाइटी के अन्य सदस्यों के साथ पिकनिक मनाने तोरपा के चंचलाघाघ गए थे. शाम करीब 4:30 बजे जब वे वापस लौट रहे थे, तभी डोडमा चकला मोड़ के पास खूंटी-सिमडेगा मुख्य मार्ग पर उनकी एसयूवी अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे एक पेड़ से सीधे टकरा गई.
एयरबैग न खुलने से सिर पर लगी गंभीर चोट
हादसा इतना भीषण था कि एसयूवी का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. बताया जा रहा है कि वाहन के एयरबैग समय पर नहीं खुले, जिसके कारण सीट बेल्ट लगे होने के बावजूद दोनों पादरियों के सिर डैशबोर्ड से जोर से टकरा गए. करीब आधे घंटे तक दोनों वाहन के भीतर ही फंसे रहे और अत्यधिक चोट लगने के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई.
विधायक ने जताया शोक
इस दुखद घटना पर स्थानीय झामुमो विधायक सुदीप गुड़िया ने गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना प्रकट की और सूचना मिलते ही तत्काल सिविल सर्जन से संपर्क कर एंबुलेंस और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए.
तकनीकी विफलता और सुरक्षा मानकों पर सवाल
तोरपा की यह दुर्घटना आधुनिक वाहनों में सुरक्षा मानकों और तकनीकी विफलताओं की ओर ध्यान आकर्षित करती है. सीट बेल्ट लगे होने के बाद भी एयरबैग का न खुलना एक गंभीर तकनीकी चूक है, जो अक्सर ऐसी जानलेवा स्थितियों का कारण बनती है. इसके अतिरिक्त, मोड़ पर तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोना मानवीय भूल के साथ-साथ सड़क डिजाइन की खामियों को भी दर्शाता है. ग्रामीण मुख्य मार्गों पर ऐसे “ब्लैक स्पॉट्स” की पहचान और वहां गति सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना भविष्य की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनिवार्य है.