Jamshedpur: महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल परिसर में रविवार को जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डॉक्टरों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर गहरा असंतोष व्यक्त किया और सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो सकती हैं।
प्रमुख मांगें और ज्वलंत मुद्दे
बैठक में डॉक्टरों ने कई गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल थे स्कॉलरशिप में वृद्धि डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान छात्रवृत्ति उनकी मेहनत और महंगाई के अनुरूप नहीं है। अकादमिक सत्र में देरी सत्र पिछड़ने के कारण डॉक्टरों के करियर और प्रशिक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, अस्पताल में संसाधनों और उपकरणों की कमी के कारण मरीजों का इलाज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अत्यधिक कार्यभार और असंतुलित ड्यूटी घंटों के कारण डॉक्टरों के मनोबल में गिरावट आ रही है।
25 फरवरी की समयसीमा
जेडीए के पदाधिकारी डॉ. गणेश श्रीवास्तव ने बताया कि छात्रवृत्ति बढ़ाने और अन्य सुविधाओं में सुधार के लिए स्वास्थ्य मंत्री, विभागीय सचिव और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को औपचारिक पत्र सौंप दिया गया है। हमने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी है। लेकिन अगर 25 फरवरी तक हमारी जायज मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो हम कार्य बहिष्कार पर जाने के लिए विवश होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि संसाधनों की कमी न केवल उनके सीखने की प्रक्रिया को बाधित कर रही है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी गिर रही है। उन्होंने प्रशासन से कार्यस्थल की स्थितियों में सुधार और पर्याप्त चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि 25 फरवरी तक कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो एमजीएम अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।