वेतन चालू, गाड़ियां ठप, भ्रष्टाचार की बू
हैरानी की बात यह है कि इन वाहनों को चलाने के लिए ड्राइवरों और मैकेनिकों की नियुक्ति कागजों पर हो चुकी है और उन्हें नियमित वेतन भी दिया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इन खड़ी गाड़ियों के नाम पर डीजल और सर्विसिंग का खर्च भी फाइलों में दर्ज हो रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर गाड़ियां सड़क पर उतरी ही नहीं, तो तेल कहाँ जल रहा है और सर्विसिंग किसकी हो रही है।
चुनावी शोर में मौन हैं प्रत्याशी
नगर निगम चुनाव की सरगर्मी तेज है। मेयर से लेकर वार्ड पार्षद तक के प्रत्याशी विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि किसी भी प्रत्याशी के घोषणापत्र में इस बर्बादी का जिक्र तक नहीं है।
जनता से अपील, अब तो पूछिए सवाल
यह पैसा किसी अधिकारी या नेता का नहीं, बल्कि हजारीबाग की जनता का है जो टैक्स के रूप में चुकाया गया है। चुनाव के इस दौर में मतदाताओं के पास सबसे बड़ी ताकत है। जब भी कोई प्रत्याशी वोट मांगने आपके दरवाजे पर आए, तो उनसे यह जरूर पूछें इन करोड़ों की गाड़ियों को सड़ाने का जिम्मेदार कौन है क्या जीतने के बाद इन गाड़ियों का हिसाब होगा या फाइल दबा दी जाएगी अगर आज सवाल नहीं पूछा गया, तो आने वाले पांच सालों तक फिर से इसी तरह जनता की गाढ़ी कमाई सिस्टम की भेंट चढ़ती रहेगी।