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  • 2026-02-18

Jamshedpur Big News: जमशेदपुर से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी सिंडिकेट का भंडाफोड़, थाईलैंड भेजकर युवाओं से ठगी

Jamshedpur Big News: झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो राज्य के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजता था और वहां उन्हें साइबर गुलाम बना लेता था. सीआईडी की साइबर सेल ने इस मामले में जमशेदपुर के आजादनगर थाना क्षेत्र से सरताज आलम नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. आरोपी पर आरोप है कि वह विदेश में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर स्थानीय युवाओं को सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर ठगी के दलदल में धकेलता था.

केके पार्क स्कैम कंपाउंड में बंधक बनते थे युवा
यह पूरी कार्रवाई रांची साइबर क्राइम थाने में दर्ज कांड संख्या 158/25 के आधार पर की गई है. जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि युवाओं को बैंकॉक स्थित “केके पार्क” नामक साइबर स्कैम कंपाउंड भेजा जाता था. वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए जाते थे. युवाओं को जेल जैसी परिस्थितियों में कैद रखकर भारत और अन्य देशों के नागरिकों के साथ डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था.

आकर्षक ऑफर और प्रताड़ना का खेल
गिरोह की कार्यप्रणाली काफी संगठित थी. अनधिकृत एजेंट युवाओं को थाईलैंड, कंबोडिया, लाओस और बैंकॉक में डाटा एंट्री की आकर्षक नौकरी का झांसा देते थे. वीजा और टिकट के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी, लेकिन विदेश पहुंचने पर उन्हें साइबर ठगी का प्रशिक्षण दिया जाता था. युवाओं से सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनवाकर लोगों को निवेश के नाम पर चूना लगवाया जाता था. काम करने से इनकार करने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और उन्हें कंपाउंड से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं तार
सीआईडी की प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस रैकेट का जाल झारखंड के अलावा अन्य राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ है. जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और विदेशी कनेक्शन को खंगालने में जुटी हैं. पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के बाद इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े चेहरों का खुलासा हो सकता है.

यह मामला आधुनिक समय के “मानव तस्करी” और “साइबर अपराध” के खतरनाक मेल को दर्शाता है. गिरोह केवल आर्थिक ठगी नहीं कर रहा, बल्कि युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें अपराधी बनाने पर मजबूर कर रहा है. “साइबर स्लेवरी” का यह उभरता हुआ ट्रेंड सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसके केंद्र विदेशों (विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशिया) में स्थित हैं, जहां स्थानीय कानून की पहुंच सीमित हो जाती है. युवाओं को सोशल मीडिया पर मिलने वाले विदेशी नौकरी के विज्ञापनों के प्रति अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है.
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