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  • 2026-02-19

Jharkhand Legislative Assembly: विधानसभा में स्पीकर ने विधायकों की गैरमौजूदगी पर ली चुटकी, कहा- लगता है निकाय चुनाव का असर है

Jharkhand Legislative Assembly: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन न केवल जनहित के मुद्दों के लिए, बल्कि सदन में हुए हंसी-मजाक और रोचक टिप्पणियों के लिए भी चर्चा में रहा. प्रश्नकाल के दौरान जब कई विधायक अपनी सीट से नदारद दिखे, तो विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने अपने खास अंदाज में चुटकी लेने से परहेज नहीं किया.

“गाड़ी छूट गई”, जब सदन में गूंजे ठहाके
प्रश्नकाल की शुरुआत में जब स्पीकर ने प्रश्न पूछने के लिए राज सिन्हा, सत्येंद्रनाथ तिवारी और पूर्णिमा साहू का नाम पुकारा, तो ये तीनों सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे. कुछ देर बाद जब विधायक पूर्णिमा साहू अपना सवाल रखने के लिए खड़ी हुईं, तो स्पीकर ने मुस्कुराते हुए कहा, "गाड़ी छूट गई". इतना ही नहीं, स्पीकर ने खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी की विभाग के प्रति “तत्परता” को लेकर भी हल्की चुटकी ली, जिससे सदन का माहौल खुशनुमा हो गया.

शून्यकाल में मांगों की झड़ी, सड़क से लेकर जेपीएससी तक
हंसी-मजाक के बीच विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को भी प्रमुखता से सदन के पटल पर रखा. शून्यकाल के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उठीं:

  • जेपीएससी अभ्यर्थियों का मुद्दा: कई विधायकों ने जेपीएससी परीक्षा में उम्र सीमा की गणना 1 अगस्त 2017 के बजाय 2018 करने और परीक्षा जल्द आयोजित करने की मांग की.
  •  विस्थापन और सड़क: लातेहार में बिना पुनर्वास घर तोड़े जाने पर रोक और चांडिल में फोर लेन सड़क पर पुल निर्माण जैसे मुद्दे छाए रहे.
  •  शिक्षा और स्वास्थ्य: चास कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू करने और गुमला के उप-स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित डॉक्टरों की तैनाती की मांग उठाई गई.
  •  स्थानीय समस्याएं: जगन्नाथपुर में धान खरीद, चतरा में पर्यटन विकास और बरही में ट्रांसफॉर्मर मरम्मत जैसे विषयों पर भी ध्यान खींचा गया.

विधानसभा के भीतर स्पीकर की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि सदन की कार्यवाही केवल गंभीर बहसों का केंद्र नहीं, बल्कि जीवंत संवाद का मंच भी है. निकाय चुनाव का जिक्र कर उन्होंने परोक्ष रूप से विधायकों की सक्रियता और सदन के प्रति उनकी जिम्मेदारी को रेखांकित किया. वहीं, शून्यकाल में जिस तरह से जेपीएससी उम्र सीमा और विस्थापन जैसे मुद्दे उठे, वे बताते हैं कि चुनावी साल में जनप्रतिनिधि युवाओं और स्थानीय जनता की नाराजगी मोल लेने के मूड में नहीं हैं.
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