Jharkhand Budget 2026-27: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये का बजट पेश करते हुए इसे “मुस्कान लाने वाला बजट” करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद सरकार पीपीपी (PPP), सीएसआर (CSR) और बाहरी एजेंसियों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने पर काम कर रही है. साथ ही, दावोस में आयोजित World Economic Forum 2026 में राज्य की भागीदारी ने हरित औद्योगिकीकरण और सतत विकास के प्रति झारखंड की वैश्विक प्रतिबद्धता को भी मजबूती से पेश किया है.
PESA कानून का शंखनाद और निकायों को बड़ी हिस्सेदारी
राज्य सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 2 जनवरी 2026 से बहुप्रतीक्षित PESA कानून लागू कर दिया है. इसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को अब बालू घाट प्रबंधन, लाभुक चयन और हाट-बाजार के संचालन का अधिकार मिलेगा, जिससे “जमीन से जुड़े स्वशासन” की नई नींव रखी गई है. साथ ही, नगर निकायों को शुद्ध स्व-कर राजस्व का 4 प्रतिशत देने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत 1172.66 करोड़ रुपये की भारी राशि स्थानीय विकास के लिए जारी की जाएगी.
कृषि में बढ़ता रोजगार और “महिला किसान खुशहाली योजना”
बजट में कृषि और स्वरोजगार के आंकड़ों ने सबको चौंकाया है. अद्यतन श्रमबल सर्वेक्षण के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में रोजगार का स्तर 44.3% से बढ़कर 50.4% हो गया है. महिला किसानों को तकनीकी और बाजार से जोड़ने के लिए “महिला किसान खुशहाली योजना” की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 25 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान है. किसानों की ऋण माफी और आय बढ़ाने को सरकार ने अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है.
शिक्षा का विस्तार: 100 नए CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस
शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए धनबाद में 2 और पलामू, लातेहार तथा गढ़वा में 1-1 नए बालिका आवासीय विद्यालय खोले जाएंगे. इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में 100 नए उत्कृष्ट विद्यालय (CM School of Excellence) शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि की गई है, जो राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने में सहायक होगी.
सर्वजन कल्याण और अंतिम पायदान पर फोकस
सरकार ने अपनी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं जैसे मंईयां सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन, रोजगार सृजन और पशुधन योजना के माध्यम से अंतिम पंक्ति के लोगों को मुख्यधारा में लाने का संकल्प दोहराया है. केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केन्द्रांश मद में 18 हजार 273 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. वित्त मंत्री ने दावा किया कि यह बजट न केवल राज्य की आर्थिक तस्वीर सुधारेगा, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के नए मानक स्थापित करेगा.
राधाकृष्ण किशोर का यह बजट तकनीकी रूप से “संसाधन जुटाने” और भावनात्मक रूप से “सामाजिक न्याय” के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है. PESA कानून का प्रभावी होना और ग्राम सभाओं को वित्तीय अधिकार देना आदिवासी मतदाताओं के बीच सरकार की पकड़ मजबूत करेगा. हालांकि, 18 हजार करोड़ से अधिक के केन्द्रांश की राशि प्राप्त करना सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी, क्योंकि केंद्र-राज्य समन्वय पर ही कई बड़ी योजनाओं की सफलता टिकी है. शिक्षा और महिला किसानों पर किया गया निवेश भविष्य में राज्य के मानव विकास सूचकांक (HDI) को ऊपर ले जाने में निर्णायक साबित हो सकता है.