Jharkhand: झारखंड राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने आज विधानसभा में नया बजट पेश किया। बजट पेश होते ही सदन का माहौल गरमा गया। जमशेदपुर पूर्वी विधायक पूर्णिमा साहू ने मीडिया से वार्तालाप कर बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
“पुराना बजट ही पूरा खर्च नहीं हुआ”
पूर्णिमा साहू ने कहा कि पिछली बार जब बजट पेश किया गया था, तब करीब 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन उनके अनुसार उस बजट का 70 प्रतिशत भी पूरी तरह खर्च नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछली योजनाओं का पैसा जमीन पर सही ढंग से नहीं उतारा गया, तो फिर नया और उससे बड़ा बजट लाने का क्या औचित्य है?
उन्होंने कहा कि अगर 70 प्रतिशत राशि खर्च होने का दावा भी सरकार करती है, तो शेष बची राशि कहां गई? क्या वह धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?
“जनता तक पहुंचेगा पैसा या बिचौलियों तक?”
पूर्णिमा साहू ने आरोप लगाया कि सरकार केवल आंकड़ों का खेल दिखा रही है। उन्होंने कहा कि बजट का उद्देश्य जनता के जीवन में सुधार लाना होना चाहिए, न कि केवल कागजों पर योजनाएं दिखाना।
उन्होंने सवाल किया कि क्या यह बजट वास्तव में आम लोगों के बीच पहुंचेगा या फिर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की भेंट चढ़ जाएगा?
स्वास्थ्य, रोजगार और शिक्षा पर भी उठे सवाल
पूर्व विधायक ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, रोजगार के अवसर और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि अब तक इन बुनियादी क्षेत्रों में ठोस सुधार नहीं दिखा है, तो बड़े बजट का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता।
उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घोषणाएं तो बहुत की गईं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं।
महिलाओं से किए गए वादों का क्या हुआ?
पूर्णिमा साहू ने मीडिया से वार्तालाप कर जानकारी दी कि राज्य सरकार ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा, “मंईया सम्मान योजना” के तहत हर महिला को आर्थिक सहायता देने की घोषणा और 450 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की का वादा किया था। लेकिन अब इन सबका वास्तविक क्रियान्वयन कितना हुआ है?
उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि अब तक इन वादों पर क्या प्रगति हुई है और आम महिलाओं को इसका कितना लाभ मिला है।
“हर वर्ग को लाभ मिले, ऐसा हो बजट”
पूर्णिमा साहू ने कहा कि बजट ऐसा होना चाहिए जो समाज के हर वर्ग को संतुलित लाभ दे, न की आंकड़ों का संतुलन हो। इन बजट का जमीनी स्तर पर परिणाम दिखना जरूरी है।
उन्होंने इस बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि इसमें उन्हें विकास से ज्यादा राजनीतिक बाजीगरी नजर आई।
अब इस बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बहस और तेज होने के आसार हैं। उनका कहना है कि घोषित योजनाएं वास्तव में आम लोगों को लाभ पहुंचाती हैं या फिर वे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं।