Ranchi Crime News: रांची में नशे के सौदागरों ने अब मादक पदार्थों की तस्करी के लिए डार्क वेब और हाईटेक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जिसका रांची पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए खुलासा किया है. एसएसपी राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना पर सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नीदरलैंड से पार्सल के जरिए घातक ड्रग्स मंगाने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है.
उच्च शिक्षा प्राप्त छात्र निकले नशे के सौदागर
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुमार अभिषेक और अविनाश कुमार मिश्रा के रूप में हुई है, जो पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त छात्र हैं. इनमें कुमार अभिषेक B.Tech का छात्र है, जबकि अविनाश B.Com की पढ़ाई कर रहा है. इन युवाओं का इस काले कारोबार में शामिल होना पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला विषय है, क्योंकि ये तकनीकी रूप से सक्षम होने के कारण कानून की नजरों से बचने के नए रास्ते अपना रहे थे.
क्रिप्टो करेंसी और डार्क वेब का हाईटेक नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डार्क वेब का उपयोग कर विदेशों से ड्रग्स मंगवाता था और पकड़े जाने के डर से इसका भुगतान भारतीय मुद्रा के बजाय क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से सीधे नीदरलैंड में किया गया था. नशे की यह खेप अंतरराष्ट्रीय डाक सेवा के माध्यम से एक सफेद लिफाफे में छिपाकर भेजी गई थी. भुगतान के लिए क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि ट्रांजैक्शन का कोई डिजिटल सुराग न मिल सके.
ओझा मार्केट के पास पुलिस की घेराबंदी और गिरफ्तारी
25 फरवरी की दोपहर पुलिस को सूचना मिली कि हेसल स्थित ओझा मार्केट के पास इस पार्सल की डिलीवरी होने वाली है, जिसके बाद कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोए के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा. तलाशी के दौरान इनके पास से एक लिफाफा बरामद हुआ, जिस पर “NEDERLAND INTERNATIONAL” का टिकट लगा था. लिफाफे के अंदर से 100 एलएसडी (LSD) पैच बरामद किए गए, जो रंग-बिरंगे कागज के टुकड़ों जैसे दिखते हैं और बेहद घातक श्रेणी का नशा माने जाते हैं.
शहर के युवाओं को निशाना बनाने की थी तैयारी
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे इस ड्रग्स को रांची के युवाओं के बीच ऊंचे दामों पर खपाने की योजना बना रहे थे. फिलहाल पुलिस इस गिरोह की अन्य कड़ियों को खंगाल रही है ताकि शहर के उन अन्य युवाओं का पता लगाया जा सके जो इस डार्क वेब नेटवर्क से जुड़े हुए हैं. रांची पुलिस के “एंटी-ड्रग्स” अभियान में इसे एक बड़ी तकनीकी और रणनीतिक सफलता माना जा रहा है.