Concern Advises Citizens In Middle East: इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान के भीषण पलटवार ने मध्य पूर्व (Middle East) को युद्ध की आग में झोंक दिया है. इस संवेदनशील स्थिति पर भारत सरकार ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बयान जारी कर क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. भारत ने स्पष्ट किया है कि हिंसा का यह दौर न केवल क्षेत्र, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी खतरा है.
विदेश मंत्रालय के मुख्य संदेश
संयम की अपील: भारत ने सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और तनाव को और अधिक न बढ़ाने का आग्रह किया है.
डिप्लोमेसी पर जोर: मंत्रालय ने कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति (Diplomacy) के माध्यम से ही निकाला जाना चाहिए.
संप्रभुता का सम्मान: भारत ने कड़े शब्दों में कहा कि सभी देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए.
नागरिक सुरक्षा: आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने की अपील की गई है.
भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी
युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार अलर्ट पर है. विदेश मंत्रालय ने बताया है कि:
- ईरान और खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय मिशन (दूतावास) अपने नागरिकों के साथ निरंतर संपर्क में हैं.
- नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने और स्थानीय सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है.
- भारतीयों से अनुरोध किया गया है कि वे दूतावास में अपना पंजीकरण कराएं ताकि आपात स्थिति में सहायता दी जा सके.
नेतन्याहू का अयातुल्ला सरकार पर हमला
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है. उन्होंने कहा कि ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई वहां के नागरिकों को “क्रूर सरकार” से मुक्त होने का मौका देगी. नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि अयातुल्ला शासन पिछले 47 वर्षों से आतंक का जाल फैला रहा है और परमाणु हथियारों के जरिए इजरायल को मिटाने की साजिश रच रहा है.