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  • 2026-03-08

Jharkhand News: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार, चक्रधरपुर में डिब्बे में नवजात का शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन

Jharkhand: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जिसने राज्य की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक नवजात की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता इस कदर देखने को मिली कि परिजनों को अपने कलेजे के टुकड़े के शव को एक प्लास्टिक के डिब्बे में भरकर घर ले जाना पड़ा.


जानकारी के अनुसार कराइकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम अपनी पत्नी रीता तिरिया को तीन दिन पहले प्रसव के लिए अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर में भर्ती कराए थे. शनिवार को रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई. 

कुछ समय बाद ही नवजात की मौत हो गई

परिजनों का आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने किसी प्रकार की सहायता नहीं की. न तो शव को घर पहुंचाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई और न ही कोई अन्य व्यवस्था की गई. मजबूरी में रामकृष्ण हेम्ब्रम नवजात के शव को एक डब्बे में रखकर अपने गांव ले गए.

नवजात के शव को एक डब्बे में रखकर अपने गांव ले गए

इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में गांव से आने वाले मरीजों के साथ अक्सर ठीक व्यवहार नहीं किया जाता. अगर स्वास्थ्य विभाग चाहता तो एंबुलेंस के माध्यम से मृत नवजात और परिजनों को उनके घर तक पहुंचाया जा सकता था. 

सरकार दोनों को कटघरे में खड़ा कर रही

इस घटना ने एक बार फिर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर जहां राज्य में करोड़ों रुपये खर्च कर मुख्यमंत्री आवास को नया स्वरूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खनिज संपदा से भरपूर कोल्हान प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा से स्वास्थ्य विभाग की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो व्यवस्था और सरकार दोनों को कटघरे में खड़ा कर रही हैं. 

थैलेसीमिया पीड़ित को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला

हाल के दिनों में कभी थैलेसीमिया पीड़ित को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला सामने आता है, तो कभी नवजात के शव को परिजनों को झोले या डब्बे में ले जाने को मजबूर होना पड़ता है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था कब सुधरेगी और गरीब व ग्रामीण मरीजों को सम्मानजनक इलाज कब मिलेगा.
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