मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी
कृषि निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर उपयुक्त भूमि की पहचान करने को कहा गया है। इस संबंध में सहायक कृषि निदेशक (रसायन) ने सभी संबंधित जिलों के कृषि पदाधिकारियों को पत्र भेजकर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय नियमों के अनुसार प्रत्येक प्रस्तावित प्रयोगशाला के निर्माण के लिए करीब 5000 वर्गफीट जमीन की आवश्यकता होगी।
5000 वर्गफीट जमीन की आवश्यकता होगी
जिन जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित करने को कहा गया है, उनमें बोकारो, कोडरमा, खूंटी, पलामू, गोड्डा, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, जामताड़ा, चतरा, रामगढ़, गढ़वा, देवघर, धनबाद और लोहरदगा शामिल हैं। इन जिलों के जिला कृषि पदाधिकारियों को जल्द से जल्द उपयुक्त जमीन की पहचान कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
पहचान कर रिपोर्ट देने का निर्देश
विभाग की ओर से निर्देश दिया गया है कि संबंधित जिलों के अधिकारी दो कार्य दिवस के भीतर निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। रिपोर्ट में वर्तमान स्थिति, प्रस्तावित स्थल का विवरण, भूमि का क्षेत्रफल और स्थान की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही प्रस्तावित जमीन का फोटोग्राफ भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इसके अलावा अधिकारियों से यह भी जानकारी मांगी गई है कि जिले में पहले से मौजूद मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं के उपकरणों की भौतिक स्थिति क्या है। यदि किसी जिले में प्रयोगशाला का निर्माण वित्तीय वर्ष 2011-12 में हुआ हो तो उसका विशेष उल्लेख करने का निर्देश दिया गया है।
किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद
सरकार का मानना है कि नई मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं बनने से किसानों को अपने खेत की मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की स्थिति और उर्वरक के सही उपयोग की जानकारी मिल सकेगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी।