Jamshedpur News: अप्रैल में शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र से पहले जमशेदपुर के अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. निजी स्कूलों में इस बार कॉपी-किताबों और स्कूल ड्रेस की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. केवल सामग्री ही नहीं, बल्कि दर्जनों स्कूलों ने मासिक फीस में भी 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है. नामांकन के समय तीन महीने की फीस एक साथ जमा करने की मजबूरी ने मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल दिया है.
पुराने बुक स्टोर पर उमड़ी भीड़
महंगी नई किताबों से बचने के लिए साकची स्थित पुरानी किताबों की दुकानों पर सुबह से ही अभिभावकों की भारी भीड़ देखी जा रही है. लोग कड़ी धूप में बच्चों के साथ सस्ती किताबों की तलाश में भटक रहे हैं. हालांकि, यहां भी राह आसान नहीं है. प्रकाशकों द्वारा किताबों के चैप्टर और क्रम में मामूली बदलाव (एडिशन चेंज) किए जाने के कारण स्कूल पुरानी किताबों के इस्तेमाल पर रोक लगा देते हैं. साकची की करीब 35 दुकानों में कोल्हान के दूर-दराज इलाकों से भी लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन स्टॉक की कमी और सिलेबस में बदलाव बड़ी समस्या बनी हुई है.
प्रशासन की रोक के बावजूद स्कूलों की "सेटिंग"
शिक्षा विभाग ने सत्र 2025-26 की तरह इस बार भी स्कूल परिसर के भीतर किताबें बेचने पर पाबंदी लगा रखी है. लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसका नया तोड़ निकाल लिया है. स्कूल अब परिसर में बिक्री तो नहीं कर रहे, लेकिन बुक लिस्ट के साथ एक निश्चित विक्रेता या दुकान का नाम तय कर देते हैं. अभिभावकों को अप्रत्यक्ष रूप से वहीं से खरीदारी करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उन्हें खुले बाजार की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है.
यूनिफॉर्म के दाम भी आसमान पर
स्टेशनरी के साथ-साथ इस साल स्कूल ड्रेस के कपड़ों और सिलाई की दरों में भी 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. जिन परिवारों में दो या तीन बच्चे स्कूल जाते हैं, उनके लिए नया सत्र शुरू करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. अभिभावकों का कहना है कि हर साल होने वाली यह बेतहाशा बढ़ोतरी उनके नियमित बजट को पूरी तरह प्रभावित कर रही है, जबकि गुणवत्ता के नाम पर केवल लागत बढ़ाई जा रही है.