Jamshedpur Breaking: झारखंड हाईकोर्ट में जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) के अवैध निर्माणों से जुड़ी जनहित याचिका पर अहम सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले को सुना. हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पूरा मामला वर्तमान में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के विचाराधीन है. इसे देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई भी नया आदेश पारित करने से मना कर दिया और अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह का समय तय किया है.
24 बहुमंजिला इमारतों पर लटकी थी तलवार
यह पूरा मामला जमशेदपुर के पॉश इलाकें यानी साकची, कदमा और बिष्टुपुर से जुड़ा है. जनवरी में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग 24 ऐसी बहुमंजिला इमारतों को ढहाने का आदेश दिया था, जिनका निर्माण नक्शा विचलन (Map Deviation) कर किया गया था. इस आदेश के बाद शहर में हड़कंप मच गया था, लेकिन प्रभावित पक्ष तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां से उन्हें ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर राहत (Stay) मिल गई.
मौजूदा स्थिति: नक्शा विचलन और अवैध अतिक्रमण पर असमंजस
याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता विजय कुमार रॉय ने अदालत को सूचित किया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट की रोक अभी भी बरकरार है, इसलिए फिलहाल कोई भी दंडात्मक कार्रवाई संभव नहीं है. हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए मामले को स्थगित कर दिया है. अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि जमशेदपुर के इन अवैध ढांचों का भविष्य क्या होगा.