अफवाह ने लिया खूनी रूप
घटना की शुरुआत सोमवार को हुई जब एक अनजान वृद्ध महिला को गांव में भटकते देखा गया। बिना किसी ठोस आधार के, किसी शरारती तत्व ने बच्चा चोर होने का शोर मचा दिया। देखते ही देखते यह अफवाह पूरे गांव में फैल गई। उग्र भीड़ ने महिला को घेर लिया और जब वह डर के मारे सवालों का जवाब नहीं दे सकी, तो भीड़ ने कानून हाथ में ले लिया। महिला को लात-घूंसों और डंडों से तब तक पीटा गया जब तक वह लहूलुहान होकर गिर नहीं गई।
पुलिस का साहसिक रेस्क्यू
सूचना मिलते ही चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उत्तेजित भीड़ के बीच से महिला को सुरक्षित निकालना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महिला को रेस्क्यू किया और पीसीआर वैन से तुरंत अनुमंडल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसका उपचार जारी है।
मानसिक रूप से विक्षिप्त हो सकती है महिला, संदिग्ध को देखकर कानून हाथ में न लें
प्रारंभिक जांच में महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त या रास्ता भटकी हुई लग रही है। पुलिस उसके परिजनों की तलाश के लिए आसपास के थानों और सोशल मीडिया का सहारा ले रही है, किसी भी संदिग्ध को देखकर कानून हाथ में न लें। अफवाह फैलाने वालों और हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। संदिग्ध दिखने पर तुरंत 100 नंबर पर कॉल करें। रामडा की यह घटना हमारी सामाजिक चेतना पर गहरा प्रहार है। एक असहाय बुजुर्ग को भीड़ की सनक का शिकार बनाना यह दर्शाता है कि अफवाहें कितनी जानलेवा हो सकती हैं।