Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों के इस्तेमाल को लेकर सदन का माहौल गरमाया रहा. विपक्षी सदस्यों ने निजी कंपनियों को दिए जा रहे भारी-भरकम किराए पर सवाल उठाए, वहीं सरकार ने अपना विमान खरीदने की तुलना में किराए के विकल्प को अधिक व्यावहारिक और किफायती बताया.
निजी कंपनियों को अरबों के भुगतान पर सवाल
विधायक शशि भूषण मेहता ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार निजी एजेंसियों को हेलीकॉप्टर और विमानों के किराए के रूप में अरबों रुपये का भुगतान कर रही है. उन्होंने इसे सरकारी खजाने का दोहन बताते हुए मांग की कि झारखंड सरकार को अपना स्थायी हेलीकॉप्टर खरीदना चाहिए. मेहता ने सवाल किया कि क्या सरकार की मंशा वास्तव में जनता का पैसा बचाने की है या वह निजी कंपनियों को लाभ पहुँचाना चाहती है.
हादसे और मुआवजे पर तीखी नोकझोंक
बहस के दौरान लातेहार में हुए हेलीकॉप्टर हादसे का मुद्दा भी गूंजा. विधायक मेहता ने कहा कि निजी कंपनी के विमान हादसे में सात लोगों की जान चली गई, लेकिन जवाबदेही तय नहीं हुई. उन्होंने मृतकों के परिजनों को 5-5 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की. इस पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब दिया कि चतरा (लातेहार सीमा) की घटना दुखद है और डीजीसीए इसकी जांच कर रहा है. उन्होंने बताया कि संबंधित कंपनी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और पीड़ितों को उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा.
सरकार ने गिनाईं खरीद की चुनौतियां
विधायक नवीन जयसवाल द्वारा खरीद प्रक्रिया में देरी और वार्षिक खर्च पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि नया हेलीकॉप्टर खरीदना फिलहाल प्राथमिकता नहीं है. मंत्री ने तर्क दिया कि एक नए हेलीकॉप्टर की कीमत 80 करोड़ से 100 करोड़ रूपए के बीच होती है, और इसके रखरखाव, पायलटों के वेतन व तकनीकी संचालन पर होने वाला खर्च इसे काफी महंगा बना देता है. उन्होंने उदाहरण दिया कि बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य भी किराए की सेवाओं पर ही निर्भर हैं.
विपक्ष के भीतर ही बंटी नजर आई राय
इस मुद्दे पर दिलचस्प स्थिति तब बनी जब भाजपा के ही नेता सीपी सिंह ने सरकार के तर्क का समर्थन किया. उन्होंने तकनीकी पहलुओं का हवाला देते हुए कहा कि अपना विमान या हेलीकॉप्टर रखना और उसका रखरखाव करना व्यवहारिक रूप से घाटे का सौदा होता है. उनके अनुसार, जरूरत के वक्त भाड़े पर विमान लेना ही सबसे सही व्यवस्था है. इस समर्थन ने सदन में बहस की दिशा को काफी हद तक संतुलित कर दिया.