यह कार्रवाई भाजपा नेता एवं शिक्षा अधिकार कार्यकर्ता अंकित आनंद की शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्कूल द्वारा प्रत्येक छात्र से ₹1000 प्रतिमाह तथा नए नामांकन के समय ₹12,000 की अनिवार्य वसूली की जा रही है, जिसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 13 के तहत प्रतिबंधित “कैपिटेशन फीस” माना गया है।
जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी विद्यालय को जिला शुल्क समिति की अनुमति के बिना 10 प्रतिशत से अधिक शुल्क वृद्धि करने का अधिकार नहीं है। साथ ही, “भवन निधि” के नाम पर ली जा रही राशि की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। पहले से जमा राशि को आगामी शुल्क में समायोजित करने को भी कहा गया है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ शिक्षा का अधिकार अधिनियम एवं झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण अधिनियम, 2017 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताते हुए अंकित आनंद ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर रोक लगनी चाहिए और दोषी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।