Jharkhand: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों को ईद-उल-फितर और प्रकृति पर्व सरहुल की शुभकामनाएं दी हैं. दोनों पर्वो के मौके पर मुख्यमंत्री ने सामाजिक सौहार्द, प्रेम, भाईचारे और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश दिया.
ईद पर दिया प्रेम, दया और एकता का संदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईद-उल-फितर के अवसर पर अपने संदेश में सभी को दिली मुबारकबाद दी. उन्होंने कहा कि यह त्योहार प्रेम, भाईचारे, दया और आपसी सद्भाव का संदेश देता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि रमजान के महीने में किए गए संयम, सेवा और इबादत समाज में करुणा और एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं. उन्होंने सभी के खुशहाल रहने की कामना करते हुए ईद की मुबारकबाद दी.
सरहुल पर प्रकृति और परंपरा का सम्मान
मुख्यमंत्री ने प्रकृति पर्व सरहुल की भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस महापर्व की शुरुआत उल्लास और आस्था के साथ हुई है. वसंत ऋतु के आगमन और साल वृक्षों पर नए फूलों के खिलने के साथ पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा है. उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के गहरे रिश्ते का प्रतीक है.
जल, जंगल और जमीन से जुड़ा है अस्तित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी परंपरा में सरहुल का विशेष महत्व है. यह पर्व धरती, प्रकृति और जीवन के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है. उन्होंने कहा कि आज जब जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां दुनिया के सामने हैं, तब सरहुल का संदेश और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. यह पर्व हमें जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्रेरित करता है.
झारखंड की साझा संस्कृति का संदेश
ईद-उल-फितर और सरहुल, दोनों पर्वों के अवसर पर मुख्यमंत्री का संदेश झारखंड की साझा संस्कृति को भी सामने लाता है. एक ओर ईद सामाजिक सद्भाव, दया और भाईचारे की सीख देती है, तो दूसरी ओर सरहुल प्रकृति, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण की चेतना को मजबूत करता है. मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से इन पर्वों की भावना को जीवन में उतारने की अपील की.