Hazaribagh News: हजारीबाग जिले के सीमावर्ती इलाके में स्थित बलबल मुहाने नदी पर बने महत्वपूर्ण पुल की मरम्मत में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला गरमाता जा रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे इस काम में गुणवत्ता के मानकों को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लग रहे हैं जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी और भय व्याप्त है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल पर हजारों जिंदगियों का भार टिकना है वहां संवेदक द्वारा बरती जा रही यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती है.
जंग लगे लोहे से हो रही है पुल की ढलाई
मरम्मत कार्य की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. जानकारी के अनुसार पुल के ऊपरी हिस्से की ढलाई के लिए नई और मजबूत सरिया का उपयोग होना अनिवार्य था ताकि ढांचे की मजबूती बनी रहे. लेकिन आरोप है कि "मां तारा कंस्ट्रक्शन" नामक संवेदक कंपनी द्वारा पुराने और जंग लगे सरिया का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मौके पर पहुँचकर इस गड़बड़ी को पकड़ा और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
दो जिलों को जोड़ने वाली लाइफलाइन खतरे में
यह पुल केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि दो जिलों के बीच आवागमन का सबसे प्रमुख संपर्क मार्ग है. प्रतिदिन इस मार्ग से सैकड़ों भारी वाहन और आम नागरिक गुजरते हैं. ऐसे में घटिया सामग्री का उपयोग सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. ग्रामीणों का तर्क है कि यदि बुनियादी ढांचे में ही पुराना लोहा लगा दिया जाएगा तो भविष्य में पुल की उम्र कम हो जाएगी और यह कभी भी धराशायी हो सकता है.
प्रशासनिक चुप्पी और जांच की मांग
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत कई बार विभागीय अधिकारियों से की है लेकिन अब तक संवेदक के खिलाफ कोई "ठोस कार्रवाई" नहीं हुई है. अधिकारियों की इस चुप्पी ने ठेकेदार के हौसले और बुलंद कर दिए हैं. अब थक हारकर स्थानीय लोगों ने हजारीबाग उपायुक्त से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए.