मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष बजरंग लाल अग्रवाल ने बताया कि गणगौर पर्व मारवाड़ी समाज का एक प्रमुख लोक पर्व है, जिसे विशेष रूप से महिलाओं द्वारा श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जिसमें कुंवारी कन्याएं और सुहागन महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। उन्होंने बताया कि ‘गण’ का अर्थ भगवान शिव और ‘गौर’ का अर्थ माता पार्वती होता है, और यह पर्व अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है।
गणगौर की परंपरा के अनुसार महिलाएं मिट्टी के कुंड में गेहूं और जौ बोती हैं और सात दिनों बाद गौरी-ईसर की रंग-बिरंगी प्रतिमाएं बनाकर लोकगीतों के साथ पूजा-अर्चना करती हैं। मान्यता है कि रति ने भगवान शिव की तपस्या कर अपने पति कामदेव को पुनर्जीवित करवाया था, उसी की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। होली के अगले दिन से शुरू होकर 16 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन आज विसर्जन के साथ हुआ।
महामंत्री बबलु अग्रवाल ने बताया कि इस आयोजन में महिलाओं ने नाच-गाकर, पूजा-पाठ कर हर्षोल्लास के साथ गणगौर एवं जवारा का विसर्जन किया। वहीं कोषाध्यक्ष सन्नी संघी ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां साझा कीं। आयोजन स्थल पर शीतल जल, शर्बत और चाट आदि की भी व्यवस्था की गई थी।
विशेष रूप से, मारवाड़ी सम्मेलन साकची शाखा की ओर से 300 बयावली बेटियों और बहुओं को उपहार देकर सम्मानित किया गया, जिससे आयोजन में और भी उत्साह देखने को मिला।
इस सफल आयोजन में अध्यक्ष बजरंग लाल अग्रवाल, महामंत्री बबलु अग्रवाल मिनी, कोषाध्यक्ष सन्नी संघी सहित कई पदाधिकारियों और समाज के गणमान्य लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हजारों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित होकर इस पारंपरिक उत्सव के साक्षी बने।