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  • 2026-03-22

Kharkai River Pollution: चैती छठ पर खरकई नदी की बदहाली, गंदगी के बीच अर्घ्य देंगे व्रती? आदित्यपुर नगर निगम की कार्यशैली पर उठे सवाल

Kharkai River Pollution: लोक आस्था के महापर्व चैती छठ की शुरुआत के साथ ही आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के छठ व्रतियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. खरकई नदी के घाटों पर फैली गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता ने उत्सव के उत्साह को फीका कर दिया है. स्थिति यह है कि नदी के किनारे और सीढ़ियों पर शराब की खाली बोतलें और कांच के टुकड़े बिखरे पड़े हैं, जिससे नंगे पांव चलने वाले श्रद्धालुओं के चोटिल होने का खतरा बना हुआ है. अब तक सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम न होने से स्थानीय नागरिकों में जिला प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष देखा जा रहा है.

डंपिंग यार्ड में तब्दील हुई खरकई नदी
लगातार हो रही अनदेखी के कारण जीवनदायिनी मानी जाने वाली खरकई नदी अब एक डंपिंग यार्ड के रूप में नजर आने लगी है. पानी का जलस्तर कम होने और शहर का कचरा सीधे नदी में गिरने से स्वच्छ जल अब काले कीचड़ में तब्दील हो चुका है. छठ महापर्व के अर्घ्य तक के सभी विधान नदी तट पर ही संपन्न होते हैं, लेकिन पानी की दुर्गंध और गंदगी ने व्रतियों के लिए पवित्र स्नान करना भी दूभर कर दिया है. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच नदी का यह स्वरूप प्रशासन की विफलता का जीवंत प्रमाण है.

घनी आबादी वाले क्षेत्र में सुरक्षा पर सवाल
आदित्यपुर नगर निगम एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है जहां बड़ी संख्या में परिवार चैती छठ का व्रत करते हैं. ऐसे संवेदनशील समय में घाटों के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और बिखरी हुई दारू की बोतलें पुलिस प्रशासन की गश्ती और सतर्कता पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पर्व शुरू होने के बावजूद घाटों की बैरिकेडिंग या लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. अंधेरा होने के बाद इन घाटों पर जाना किसी बड़े खतरे को निमंत्रण देने जैसा महसूस हो रहा है, जिसे लेकर महिलाएं विशेष रूप से डरी हुई हैं.

समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने आदित्यपुर नगर निगम और जिला पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वे समय रहते इस गंभीर समस्या का संज्ञान लें. श्रद्धालुओं की मांग है कि घाटों की तुरंत सफाई कराई जाए और कांच के टुकड़ों को हटाया जाए ताकि किसी को परेशानी न हो. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए और नदी की स्वच्छता बहाल नहीं की, तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे. फिलहाल सबकी नजरें नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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