Women Reservation Bill: केंद्र सरकार “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को जल्द जमीन पर उतारने के लिए इसे आगामी जनगणना और पूर्ण परिसीमन की शर्त से अलग करने की तैयारी में है. इस नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी, जिनमें से एक-तिहाई यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. सरकार इसके लिए संविधान संशोधन और परिसीमन अधिनियम में बदलाव के दो अलग-अलग विधेयक ला सकती है, ताकि 2029 के चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके.
बिहार में 60 और झारखंड में 21 होंगी सीटें
इस ऐतिहासिक बदलाव का सबसे बड़ा असर बिहार और झारखंड की सियासी ताकत पर पड़ेगा. 2011 की जनगणना को आधार मानकर होने वाले इस आंशिक परिसीमन से बिहार की लोकसभा सीटें वर्तमान 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी. वहीं, झारखंड की 14 सीटें बढ़कर 21 होने का अनुमान है. सीटों में होने वाली यह 50 प्रतिशत की वृद्धि दोनों राज्यों की संसद में आवाज मजबूत करेगी और जनसंख्या के अनुपात में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी.
अमित शाह की बैठक और दक्षिणी राज्यों का समीकरण
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों के साथ बैठक कर इस मसौदे पर आम सहमति बनाने की कोशिश की है. केंद्र का सुझाव है कि सभी राज्यों में सीटों का अनुपात मौजूदा स्थिति के अनुसार ही बढ़ाया जाए, ताकि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या आधारित परिसीमन से राजनीतिक नुकसान न हो. इस “समान वृद्धि” वाले फॉर्मूले से कुल 816 सदस्यीय लोकसभा का ढांचा तैयार होगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय असंतुलन कम होने की उम्मीद है.
बदलेगा क्षेत्रीय राजनीति का चेहरा
सीटों की संख्या बढ़ने से बिहार और झारखंड में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे. बिहार में जहां क्षेत्रीय दलों का प्रभाव और बढ़ने की संभावना है, वहीं झारखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्रों को संसद में अधिक जगह मिलेगी. यह बदलाव न केवल महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देगा, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के स्थानीय मुद्दों पर भी संसद में प्रभावी बहस हो सकेगी. अब सबकी नजरें संसद के अगले सत्र पर टिकी हैं, जहां इन विधेयकों को पेश किया जा सकता है.