Home Guard Recruitment: झारखंड हाईकोर्ट ने गोड्डा जिले में होम गार्ड बहाली को लेकर चल रही प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अदालत की अनुमति के बिना होम गार्ड नियुक्ति का अंतिम रिजल्ट जारी नहीं किया जाए. कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब इस पूरे प्रकरण पर चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई होगी.
2009 की बहाली अब तक अधूरी
विवाद की जड़ साल 2009 में जारी किया गया वह विज्ञापन है, जिसके तहत गोड्डा में होम गार्ड भर्ती शुरू की गई थी. उस वक्त अभ्यर्थियों की दौड़ और अन्य शारीरिक परीक्षाएं तो कराई गईं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया को कभी तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया. इसके बाद साल 2018 में सरकार ने पुराने अभ्यर्थियों को नजरअंदाज करते हुए 529 पदों के लिए नया विज्ञापन जारी कर दिया, जिससे 2009 के आवेदकों में भारी रोष व्याप्त हो गया.
पुराने अभ्यर्थियों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
नए सिरे से बहाली की तैयारी के खिलाफ सिकंदर मुर्मू समेत अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब 2009 की प्रक्रिया अब तक लंबित है, तो उसी पदों के लिए नया विज्ञापन निकालना उनके अधिकारों का उल्लंघन है. याचिका में मांग की गई है कि पहले पुरानी बहाली को पूरा किया जाए. इसी विरोध को देखते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल नई नियुक्ति प्रक्रिया के परिणाम घोषित करने पर पाबंदी लगा दी है.
अदालत के इस हस्तक्षेप के बाद गोड्डा में होम गार्ड बनने का सपना देख रहे सैकड़ों युवाओं की नजरें अब सरकार के जवाब और चार हफ्ते बाद होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं. फिलहाल, जिले में भर्ती की अंतिम प्रक्रिया अधर में लटक गई है.