Iran Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की राजनीति में भी साफ दिखने लगा है. इसी बीच कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि ईरान से जुड़े हालात पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद शामिल हो और देश को मौजूदा स्थिति पर सीधे जानकारी दें. पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ एक सामान्य बैठक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिस पर शीर्ष स्तर से स्पष्टता जरूरी है.
सर्वदलीय बैठक से पहले ही उठा नेतृत्व का सवाल
केंद्र सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए सभी दलों की बैठक बुलाने का फैसला किया है, ताकि मौजूदा हालात और भारत की रणनीति पर चर्चा हो सके. लेकिन बैठक से पहले ही कांग्रेस ने यह मुद्दा उठा दिया है कि इसमें प्रधानमंत्री की मौजूदगी जरूरी है. पार्टी का मानना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट पर सिर्फ अधिकारियों या मंत्रियों के भरोसे बात नहीं छोड़ी जा सकती. प्रधानमंत्री को खुद सामने आकर देश और राजनीतिक दलों को भरोसे में लेना चाहिए.
विदेश नीति और तैयारी को लेकर विपक्ष के सवाल
कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव को लेकर भारत की स्पष्ट रणनीति क्या है. इसके साथ ही पार्टी ने ऊर्जा सुरक्षा, गैस और तेल की सप्लाई और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी जवाब मांगा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा. ऐसे में सरकार को पहले से तैयारी और स्पष्ट योजना बतानी चाहिए.
PM के हालिया दिए गए बयान के बावजूद जारी है बहस
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था कि सरकार पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए है और कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस संकट का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है. इसके बावजूद विपक्ष का कहना है कि संसद में दिए गए बयान के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित हैं. उनका मानना है कि सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री की सीधी भागीदारी से ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.
भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं है. भारत की बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी क्षेत्र से आती है, और हजारों भारतीय वहां काम करते हैं. ऐसे में वहां की किसी भी अस्थिरता का असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है. यही वजह है कि इस मुद्दे को लेकर देश में राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है.
ईरान संकट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं किस तरह घरेलू राजनीति को प्रभावित करती हैं. अब नजर इस बात पर है कि सर्वदलीय बैठक में सरकार किस तरह की रणनीति सामने रखती है और क्या प्रधानमंत्री खुद इस मुद्दे पर नेतृत्व करते हुए सभी सवालों का जवाब देते हैं.