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  • 2026-03-25

Stationery Price Hike: जंग की मार अब स्कूली बस्ते पर, मध्य पूर्व के युद्ध से स्टेशनरी के सामानों में 10% तक उछाल

Stationery Price Hike: मध्य पूर्व में जारी युद्ध की आंच अब जमशेदपुर के बाजारों तक पहुंच गई है, जिससे स्टेशनरी के सामान महंगे होने लगे हैं. स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के लिए नामांकन का समय है, ऐसे में किताब, कॉपी और अन्य स्टेशनरी पर होने वाले खर्च ने अभिभावकों का बजट बिगाड़ दिया है. पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता और विदेशों से आने वाली सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण उन उत्पादों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं जो प्लास्टिक या केमिकल से बने हैं. साकची के थोक व्यापारियों के अनुसार, कई वस्तुओं की कीमतें पहले ही 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं.

इंक से लेकर लैमिनेशन शीट तक की कीमतों में लगी आग
कंप्यूटर प्रिंटर इंक, जो पहले 350 रुपये में उपलब्ध था, अब उसकी कीमत बढ़कर 480 रुपये हो गई है. इसी तरह, 50 रुपये में मिलने वाला प्लास्टिक टेप अब 60 रुपये में बिक रहा है. कॉपियों के पन्ने और लैमिनेशन शीट रोल की कीमतों में भी उछाल आया है. फोटो स्टेट और कंप्यूटर दुकानों पर भी संचालन खर्च बढ़ने लगा है, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है. दुकानदारों का कहना है कि वैश्विक अस्थिरता के कारण ट्रांसपोर्टेशन और रॉ मटेरियल दोनों महंगे हो गए हैं.

नए स्टॉक के साथ एमआरपी बढ़ने के आसार
बाजार के दुकानदार के अनुसार, फिलहाल पुराने स्टॉक को पुरानी एमआरपी पर ही बेचा जा रहा है, लेकिन कंपनियों ने नए माल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दे दिए हैं. चूंकि कलम और अन्य स्टेशनरी उत्पाद प्लास्टिक से बनते हैं (जो एक पेट्रोलियम उत्पाद है), इसलिए इनकी कीमतों में भारी वृद्धि तय मानी जा रही है. डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में स्टेशनरी और महंगी हो सकती है. थोक विक्रेताओं को कंपनियों की ओर से लगातार कीमतों में बदलाव के मैसेज मिल रहे हैं.

व्यापारियों और अभिभावकों के बीच बढ़ी बेचैनी
स्टेशनरी की बढ़ती कीमतों ने न केवल अभिभावकों बल्कि छोटे व्यापारियों की भी परेशानी बढ़ा दी है. जमशेदपुर के बिष्टुपुर और साकची जैसे प्रमुख बाजारों में ग्राहक अब खरीदारी से पहले मोलभाव करते नजर आ रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो कागज और प्लास्टिक उत्पादों की किल्लत भी हो सकती है. फिलहाल बाजार में पुराने स्टॉक से काम चलाया जा रहा है, लेकिन नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही छात्रों और कार्यालयों के लिए स्टेशनरी खरीदना एक बड़ी चुनौती साबित होगा.
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