Loksabha: लोकसभा में सोमवार को बजट सत्र के दौरान इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) संशोधन विधेयक पास कर दिया गया। इस पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये कानून देश के बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने में बहुत अहम साबित हुआ है।
4.11 लाख करोड़ रुपये वापस, 1,376 मामलों का हुआ समाधान
उन्होंने ये बताया कि IBC की मदद से बैंकों ने अपने फंसे हुए कर्ज (NPA) का बड़ा हिस्सा वापस हासिल कर लिया है। दिसंबर 2025 तक करीब 1,376 कंपनियों के मामलों का समाधान हुआ, जिससे लगभग 4.11 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई।
14 दिन में स्वीकार होगा इनसॉल्वेंसी आवेदन
सरकार इस कानून में कुछ बदलाव करने जा रही है ताकि प्रक्रिया और तेज और पारदर्शी बन सके। नए नियम के तहत, अगर कोई कंपनी कर्ज चुकाने में फेल हो जाती है (डिफॉल्ट करती है), तो उसका इनसॉल्वेंसी आवेदन 14 दिनों के अंदर जरूर स्वीकार किया जाएगा।
IBC का मकसद सिर्फ वसूली नहीं, कंपनियों को दोबारा मजबूत बनाना भी है
सीतारमण ने यह भी कहा कि यह कानून सिर्फ कर्ज वसूली के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि कंपनियों को दोबारा खड़ा करने और उनकी स्थिति सुधारने के लिए है। IBC के बाद कई कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है और उनकी कार्यप्रणाली भी सुधरी है।
नए संशोधन में कुछ और अहम बातें भी शामिल
अब ग्रुप कंपनियों और विदेश से जुड़े मामलों (क्रॉस-बॉर्डर इनसॉल्वेंसी) को संभालने के लिए बेहतर व्यवस्था होगी।
प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाएगा।
कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और उनके बकाए को प्राथमिकता दी जाएगी।
सुधारों से IBC को और भी ज्यादा असरदार बनाने की कोशिश
सरकार ने यह भी माना कि कई बार केस में देरी की वजह अदालतों में चलने वाले लंबे मुकदमे होते हैं। इसलिए कोशिश की जा रही है कि प्रक्रिया को जल्दी पूरा किया जाए। सरकार का मानना है कि IBC कानून ने बैंकिंग सिस्टम को मजबूत किया है और आने वाले समय में ये बदलाव इसे और भी ज्यादा प्रभावी बनाएंगे।