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  • 2026-04-02

Jharkhand Politics: हजारीबाग नरबलि कांड पर सियासत, JMM का आरोप:- “आरोपी भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता”, BJP बोली:- “तस्वीरें सिर्फ संयोग”

Jharkhand Politics: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक खौफनाक मामला सामने आया. यहां एक कलयुगी मां ने अपने बीमार बेटे को ठीक करने के लिए एक तांत्रिक (भगतिनी) के कहने पर अपनी ही 13 वर्षीय मासूम बेटी की नरबलि चढ़ा दी. हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन के अनुसार, मृतका की मां रेशमी देवी अपने बेटे की मानसिक और शारीरिक बीमारी से परेशान थी और पिछले एक साल से गांव की महिला तांत्रिक शांति देवी के संपर्क में थी. तांत्रिक के बहकावे में आकर मां ने 24 मार्च को बेटी की बलि दे दी, जहां सहयोगियों ने मासूम का सिर कुचल दिया और उसका खून मंदिर में चढ़ाया गया. पुलिस ने मां, तांत्रिक और उसके सहयोगी भीम राम को गिरफ्तार कर लिया है.

जेएमएम का तीखा हमला: आरोपियों का भाजपा से कनेक्शन
इस वीभत्स हत्याकांड के सामने आने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने मुख्य विपक्षी दल भाजपा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने दावा किया कि इस नरबलि कांड में गिरफ्तार किया गया सहयोगी आरोपी भीम राम भाजपा का बेहद सक्रिय कार्यकर्ता है. मनोज पांडे ने आरोप लगाया कि आरोपी अक्सर भाजपा के कद्दावर सांसदों और प्रदेश अध्यक्ष के इर्द-गिर्द देखा जाता था और भाजपा द्वारा बुलाए गए हालिया बंद में भी उसने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. जेएमएम प्रवक्ता ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में व्यभिचारियों और अपराधियों का जमावड़ा लग गया है और सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरें भाजपा के झूठ की पोल खोल रही हैं.

भाजपा का पलटवार: अपराधी का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं
दूसरी तरफ, भाजपा ने जेएमएम के इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हजारीबाग में हुई यह घटना अकल्पनीय और अत्यंत वीभत्स है. उन्होंने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और इस मामले में शामिल सभी दरिंदों को सीधे फांसी की सजा मिलनी चाहिए. विपक्ष द्वारा आरोपी भीम राम को भाजपा का कार्यकर्ता बताए जाने पर प्रतुल शाहदेव ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्ति कभी भी भाजपा का न तो सक्रिय कार्यकर्ता रहा है और न ही किसी पद पर रहा है. उन्होंने सफाई दी कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के साथ आम लोगों की तस्वीरें खिंचवाना बेहद आम बात है और इसे आधार बनाकर पार्टी को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए.

कानून व्यवस्था और अंधविश्वास पर उठे गंभीर सवाल
इस खौफनाक वारदात और उसके बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी ने झारखंड में कानून-व्यवस्था और समाज में जड़ें जमाए अंधविश्वास पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां सत्ताधारी दल अपराधियों को पाताल से भी खोज निकालने और सख्त सजा देने का दावा कर रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. पुलिस की त्वरित कार्रवाई से हत्या की गुत्थी तो सुलझ गई है और 3 आरोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि 21वीं सदी में भी अंधविश्वास की बलिवेदी पर आखिर कब तक मासूमों का खून बहता रहेगा?
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