Jharkhand News: झारखंड सरकार ने कर्तव्य पालन के दौरान उग्रवादी मुठभेड़ों या असामाजिक तत्वों की हिंसा का शिकार होने वाले वीर पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के परिवारों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य के “गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग” ने विशेष क्षतिपूर्ति योजना के तहत 2 करोड़ 31 लाख 50 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. सरकार की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल द्वारा जारी किए गए इस आदेश का मुख्य उद्देश्य हिंसा में अपनी जान गंवाने वाले शहीदों के आश्रितों और गंभीर रूप से घायल हुए जांबाज जवानों को त्वरित आर्थिक सहायता पहुंचाना है.
झारखंड पुलिस से लेकर पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को मिलेगा लाभ
इस विशेष योजना का दायरा काफी व्यापक रखा गया है ताकि किसी भी मोर्चे पर डटे जवान को इसका हक मिल सके. जारी आदेश के मुताबिक, इस फंड का लाभ झारखंड पुलिस के सभी रैंक के पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को मिलेगा. इसके अलावा, राज्य में प्रतिनियुक्त केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (जैसे CRPF, BSF आदि) के विभिन्न रैंक के अधिकारियों व जवानों, स्पेशल ऑक्जिलरी पुलिस (SAP) के जवानों और होमगार्ड के जांबाजों को भी इस क्षतिपूर्ति योजना के तहत कवर किया गया है.
उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में मिलिट्री और पुलिस का मनोबल बढ़ेगा
भौगोलिक रूप से जटिल और उग्रवाद प्रभावित रहे झारखंड में पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान हमेशा उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में अग्रिम पंक्ति (Frontline) में रहते हैं. अक्सर जंगलों में होने वाली मुठभेड़ों, लैंडमाइन ब्लास्ट या अन्य हिंसक वारदातों में जवान वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं या फिर जिंदगी भर के लिए अपंग हो जाते हैं. ऐसे नाजुक वक्त में सरकार की यह योजना उन बहादुर जवानों और उनके बिलखते परिवारों को आर्थिक टूटन से बचाने और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने में बेहद मददगार साबित होगी.
बजट से होगी निकासी, महालेखाकार करेंगे खर्च का सत्यापन
प्रशासनिक नियमों के तहत यह पूरी राशि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट से खर्च की जाएगी. इस आवंटित राशि की सुरक्षित निकासी और सही वितरण की पूरी जिम्मेदारी राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) या उनके द्वारा अधिकृत वरीय अधिकारी की होगी. फंड की निकासी धुर्वा स्थित सचिवालय कोषागार (प्रोजेक्ट भवन) से की जाएगी. गृह विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ जवानों की क्षतिपूर्ति के लिए ही होगा. भविष्य में इस पूरे खर्च का सत्यापन महालेखाकार (AG) कार्यालय से कराकर उसकी फाइनल रिपोर्ट गृह विभाग की बजट शाखा को सौंपनी होगी.