Saryu Roy On Indian Railways: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रेलवे की कार्यशैली और यात्री सुविधाओं की अनदेखी पर कड़ा प्रहार करते हुए शनिवार को सोशल मीडिया पर जमकर भड़ास निकाली है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि रेलवे की राजशाही और पीड़क मानसिकता को अब खत्म करना होगा, क्योंकि जनता को होने वाली रोजाना की पीड़ा इस विभाग को दिखाई नहीं देती. उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे “शुभ लाभ” के पुराने सिद्धांत को भूलकर “लोभ लाभ” को चरितार्थ कर रहा है. रेलवे का पूरा ध्यान मालगाड़ियों से ज्यादा भाड़ा वसूलने पर है और वह आम यात्रियों के गले पर छुरी रखकर अपनी कमाई बढ़ाना चाहता है.
टाटानगर पहुंचने से पहले सवारी ट्रेनों को घंटों खड़े रखने का लगाया आरोप
सरयू राय ने वर्षों से चली आ रही ट्रेनों की लेटलतीफी पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि टाटानगर जंक्शन से 10-15 किलोमीटर पहले तक तो सभी एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें प्रायः समय से आती हैं, लेकिन जंक्शन के करीब आते ही गाड़ियां निरंतर लेट होती चली जाती हैं. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि रेलवे मोटी कमाई देने वाली मालगाड़ियों को ग्रीन सिग्नल देकर पहले निकालने के चक्कर में गरीब और मध्यम वर्ग की सवारी ट्रेनों को जगह-जगह घंटों आउटर पर खड़ा कर देता है. इस कुप्रबंधन के कारण कई दैनिक मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई और कइयों की नौकरियां तक छूट चुकी हैं.
समितियों की फौज के बावजूद ट्रेनों की लेटलतीफी पर खड़े किए सवाल
विधायक ने रेलवे के प्रशासनिक ढांचे पर उंगली उठाते हुए कहा कि रेल मंडल से लेकर रेलवे जोन स्तर तक यात्रियों की सुख-सुविधा और ट्रेनों के समयबद्ध परिचालन के लिए दर्जनों समितियों की भारी-भरकम फौज कार्यरत है. लेकिन कड़वा सच यह है कि इन समितियों के भारी-भरकम कागजी उद्देश्यों के बावजूद जमीन पर परिणाम हमेशा नकारात्मक ही निकलता है. सरयू राय ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे खुद कई बार 4 से 5 घंटे तक ट्रेनों की लेटलतीफी में फंसे हैं. उन्होंने कहा कि चांडिल में ट्रेनों को घंटों रोक कर रेलवे यात्रियों का मानसिक और आर्थिक शोषण कर रहा है.
7 अप्रैल को टाटानगर पर महाधरना, दलीय भावना से ऊपर उठने की अपील
इसी रेलवे की तानाशाही और यात्रियों के मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ विधायक सरयू राय ने आगामी 7 अप्रैल को सुबह 10:00 बजे से टाटानगर जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 1 के पास एक विशाल महाधरना का आयोजन किया है. उन्होंने जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो से भी इस धरने में शामिल होकर जनता की आवाज बनने की अपील की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि आम जनता के हक और सम्मान की लड़ाई है. उन्होंने दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक दलों और आम शहरवासियों से इस धरने में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है.