Nitish Kumar Resignation: बिहार में नई सरकार के गठन के साथ ही नीतीश कुमार की भूमिका बदलने वाली है. उनके करीबी विधायक श्याम रजक के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. इसके बाद 16 अप्रैल को वे दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां वे संसद के विशेष सत्र (17-19 अप्रैल) में हिस्सा लेंगे. नीतीश कुमार ने हाल ही में 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है, जो उनके सक्रिय राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने का स्पष्ट संकेत है. संसद के इस विशेष सत्र में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” जैसे महत्वपूर्ण बिलों पर चर्चा होनी है.
निशांत कुमार के नाम के लगे पोस्टर, डिप्टी सीएम बनने की चर्चा
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबरों के बीच पटना की सड़कों पर उनके बेटे निशांत कुमार को लेकर सियासत गरमा गई है. रविवार सुबह जेडीयू कार्यकर्ताओं ने पटना में पोस्टर लगाकर निशांत कुमार को "भविष्य का मुख्यमंत्री" और "लोकनायक" बताते हुए उन्हें पर्दे के पीछे से बाहर आने का आह्वान किया. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार की नई एनडीए सरकार में बीजेपी का मुख्यमंत्री हो सकता है, जबकि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है. हालांकि, पार्टी की ओर से अभी इन पदों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
खरमास के बाद होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण
बिहार में सत्ता परिवर्तन की तैयारी अंतिम चरण में है. 14 अप्रैल को “खरमास” समाप्त होने के बाद नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा, जिसमें बीजेपी के किसी चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. मंत्रिमंडल में ज्यादातर पुराने चेहरों को ही जगह मिलने की उम्मीद है, हालांकि कुछ नए नामों को भी शामिल किया जा सकता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 13 अप्रैल को अपनी कैबिनेट की आखिरी बैठक कर सकते हैं.
विकसित भारत और महिला आरक्षण पर फोकस
नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा केवल पद परिवर्तन तक सीमित नहीं है. वे संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संशोधनों और “विकसित भारत” के लक्ष्यों पर केंद्रित चर्चाओं में प्रमुख भूमिका निभाएंगे. जेडीयू का मानना है कि नीतीश कुमार का अनुभव केंद्र में एनडीए को और मजबूती प्रदान करेगा. इधर बिहार में पोस्टर पॉलिटिक्स और नए नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान ने आगामी चुनावों से पहले राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बेहद दिलचस्प बना दिया है.