Kandra By Forming A Fake Trust: सरायकेला के कांड्रा स्थित हरिश्चंद्र विद्या मंदिर स्कूल के करीब तीन एकड़ जमीन हथियाने के मामले में अब कांड्रा वासियों के सब्र का बांध टूटने लगा है. इसकी एक बानगी मंगलवार को देखी गयी.
जहां सैकड़ों की तादाद में हरिजन- आदिवासी महिला- पुरुषों ने फर्जी ट्रस्ट बनाकर स्कूल को हथियाने और बांधा झुड़िया बस्ती के खिलाफ फेसबुक पेज पर भड़काऊ पोस्ट करने के मामले में फर्जीवाड़े में शामिल सहयोगी जगन्नाथ मिश्रा उर्फ जुगनू मिश्रा के घर पर पूछताछ करने पहुंच गए जिसके बाद जुगनू मिश्रा ने भीड़ पर जाति सूचक गालियां देते हुए तलवार से हमला कर दिया.
उसके बाद भीड़ ने अपना संतुलन खो दिया और जुगनू मिश्रा को बंधक बनाकर उसकी जमकर पिटाई कर डाली. उसके बाद अपने साथ थाने लेकर पहुंचे और पुलिस को सौंप दिया.
पुलिस मामले की जांच कर रही है. इस मामले में जुगनू मिश्रा ने बताया कि साजिश के तहत उन्हें शिकार बनाया जा रहा है. इसमें स्थानीय लोगों की भूमिका संदिग्ध है. हरिश्चंद्र विद्या मंदिर की आड़ में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है.
हमने क्षेत्र की भलाई के लिए स्कूल को नया ट्रस्टी दिया ताकि यहां के बच्चों का विकास हो और शिक्षा का अलख जगे मगर कुछ लोगों को यह हजम नहीं हुआ और हरिजन- आदिवासी समुदाय के लोगों को भड़काकर उनके घर पर हमला करवा दिया.
इधर आक्रोशित लोगों ने साफ कर दिया है कि स्कूल के नाम पर बने ट्रस्ट से उनका कोई लेना देना नहीं है. ट्रस्ट के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करनेवाले राहुल महतो एवं लालबाबू महतो ने बताया कि उन्हें गुमराह कर हस्ताक्षर लिया गया है. उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है कि स्कूल के नाम पर कोई ट्रस्ट बना है. उन्हें मीटिंग में बुलाया जरूर गया था मगर स्कूल के संचालक के लिए कमेटी गठन करने के नाम पर उन्हें बैठक में शामिल होने बुलाया गया था और उनके दस्तखत लिए गए. बताया गया है अगली मीटिंग में आगे की रणनीति तैयार की जाएगी इसी बीच ट्रस्ट भी बन गया और ट्रस्ट का डायरेक्टर बिल्डर जितेंद्र नाथ मिश्रा बन गए. यह सरासर फर्जीवाड़ा है और इसके लिए आगे कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
इधर स्वघोषित ट्रस्टी जितेंद्र नाथ मिश्रा ने ट्रस्ट के नाम पर फर्जीवाड़े से इंकार किया है. उन्होंने बताया कि सर्वसम्मति से स्थानीय लोगों ने ट्रस्ट का चेयरमैन उन्हें चुना है ताकि स्कूल का बेहतर तरीके से संचालन हो. इसके लिए स्कूल के शिक्षकों एवं स्थानीय लोगों ने कोर्ट में लिखित शपथपत्र दायर किया है उसके बाद बोर्ड से प्रस्ताव पारित कर उन्हें चेयरमैन चुना गया. फिर ट्रस्ट को मान्यता मिली. आज स्कूल में तीन सौ से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं.
आपको बता दें कि साल 1945 में हरिश्चंद्र वार्ष्णेय ने हरिश्चंद्र विद्या मंदिर स्कूल की बुनियाद रखी थी. वे कांड्रा एसकेजी कंपनी के मालिक भी थे. मजदूरों के बच्चों को शिक्षा मिले इस उद्देश्य से उन्होंने स्कूल की स्थापना की. बाद में कंपनी के घाटा में चले जाने और पारिवारिक विवाद के कारण कंपनी दिवालिया घोषित हो गई.
कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश पर कंपनी की नीलामी भी हो गई. इस दौरान स्कूल संचालित होता रहा. कई बच्चे इस कालखंड में यहां से पास आउट होकर ऊंचे ऊंचे ओहदों पर पहुंच गए. धीरे-धीरे स्कूल के अस्तित्व का संकट गहराने लगा. स्कूल के शिक्षकों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर स्कूल के कायाकल्प की गुहार लगाई.
इस दौरान कुछ शातिर शिक्षक बड़ी चतुराई से स्कूल को मिलनेवाले फंड से मलाई खाते रहे. किसी ने दिवंगत हरिश्चंद्र वार्ष्णेय के परिवार के सदस्यों से रायशुमारी नहीं की और चोरी छिपे नया ट्रस्ट बना लिया.
ट्रस्ट बनते ही तथाकथित ट्रस्टी ने स्कूल में लगे कई पुराने इमारती पेड़ों को कटवा डाले. इसकी भनक जब दिवंगत हरिश्चंद्र वार्ष्णेय के वंशजों को लगी और वह यहां पहुंचे तो तथाकथित ट्रस्टी द्वारा उनके साथ बदसलूकी की गई.
इसकी शिकायत उन्होंने जिले के आला अधिकारियों से भी की है और पूरे मामले की जांच करने की गुहार लगाई है. यह रिपोर्ट मीडिया में सार्वजनिक होने के बाद कांड्रा वासियों के पैरों तले जमीन खिसक गई.
उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी कि स्कूल के बोर्ड आफ डायरेक्टर से वार्ष्णेय परिवार का नामोनिशान मिटा दिया गया है. जब उन्हें इसकी भनक लगी तो वे आक्रोशित हो उठे और बिल्डर और उनके सहयोगियों के खिलाफ अभियान की शुरुआत कर दी है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि पुलिस प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटती है.