Jharkhand News: झारखंड के डीजीपी ने राज्य के सभी जिलों में आत्मसमर्पित नक्सलियों की मदद के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया है. ये अधिकारी विशेष रूप से सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के रैंक के होंगे. इनका मुख्य काम पूर्व नक्सलियों की निजी समस्याओं को सुनना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में आ रही बाधाओं को दूर करना होगा, ताकि उनका पुनर्वास सुचारू रूप से हो सके.
स्पीडी ट्रायल से अदालती मामलों में मिलेगी राहत
पूर्व नक्सलियों के खिलाफ अदालतों में चल रहे लंबित मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए डीजीपी ने स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) सुनिश्चित करने को कहा है. अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए मानसिक और आर्थिक बोझ बनती है. स्पीडी ट्रायल के जरिए इन मामलों का तेजी से निपटारा होगा, जिससे उन्हें एक नई और सामान्य जिंदगी शुरू करने में आसानी होगी.
हर जिले के एसपी को मिले कड़े निर्देश
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को "प्रत्यार्पण एवं पुनर्वास नीति" का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी प्रावधानों के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और अन्य सुविधाएं बिना किसी देरी के लाभार्थियों तक पहुंचनी चाहिए. पुलिस का जोर इस बात पर है कि आत्मसमर्पण करने वालों को प्रशासनिक स्तर पर पूरा सहयोग मिले.
पुलिस प्रशासन अब जंगलों में सक्रिय नक्सलियों तक इस पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा. इसका उद्देश्य उन्हें यह बताना है कि सरकार की नीतियां उनके हक में हैं और आत्मसमर्पण के बाद उन्हें सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर भविष्य की गारंटी भी मिलती है. डीजीपी के इन निर्देशों से साफ है कि झारखंड पुलिस अब नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए कानून और प्रशासन, दोनों मोर्चों पर सक्रियता बढ़ा रही है.