Women Reservation Bill 2026: संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम का असली उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण करना नहीं, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को बदलना है. उन्होंने इसे एक राजनीतिक चाल बताते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.
दक्षिण भारत और आरक्षण पर तीखे आरोप
राहुल गांधी ने सरकार द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों यानी संविधान (131वां संशोधन), परिसीमन संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन को लेकर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि हम दक्षिण राज्यों को कमजोर नहीं होने देंगे. साथ ही उन्होंने केंद्र पर एससी-एसटी समुदायों के हक छीनने और मनुवाद को संविधान से ऊपर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए. उनके भाषण के दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें कई बार रोकने की कोशिश की, जब वे जादूगर की कहानी के जरिए तंज कस रहे थे.
सरकार पर लगाए 9 गंभीर आरोप
विपक्ष के नेता ने सदन के पटल पर सरकार के खिलाफ 9 सूत्रीय आरोपों की झड़ी लगा दी. उन्होंने इस विधेयक को "राष्ट्रविरोधी" करार देते हुए कहा कि सरकार को सत्ता जाने का डर है, इसलिए वह आदिवासियों और दलितों के प्रतिनिधित्व के साथ खिलवाड़ कर रही है. राहुल ने कहा कि आदिवासियों को हिंदू कहा जाता है लेकिन उन्हें उचित स्थान नहीं दिया जाता. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल महिलाओं के लिए नहीं है, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए लाया गया है.
महिलाओं की भूमिका पर भावुक टिप्पणी
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने अपनी दादी इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे डर के खिलाफ लड़ना सिखाया है. उन्होंने महिलाओं को देश की सोच का "ड्राइविंग फोर्स" बताया और कहा कि हम सभी ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है. राहुल गांधी के इन बयानों के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे महिला आरक्षण बिल पर जारी बहस और भी गरमा गई है.