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  • 2026-04-18

Jharkhand News: विवि में VC की नियुक्ति पर अब नहीं होगा टकराव, राज्यपाल ने “विश्वविद्यालय विधेयक 2026” को दी मंजूरी

Jharkhand News: झारखंड में अब विश्वविद्यालयों के कुलपति (VC) और प्रति-कुलपति (Pro-VC) की नियुक्ति राज्यपाल और मुख्यमंत्री मिलकर करेंगे. राज्यपाल संतोष गंगवार ने शुक्रवार को “झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026” को अपनी स्वीकृति दे दी है. इस नए कानून के तहत अब नियुक्ति का अधिकार किसी एक पक्ष के पास न होकर संयुक्त रूप से होगा. बता दें कि यह विधेयक इसी साल 17 मार्च को बजट सत्र के दौरान विधानसभा से पारित हुआ था, जिसका उद्देश्य विवि प्रशासन और शैक्षणिक मानकों में एकरूपता लाना है.

खोज समिति (Search Committee) करेगी नामों का चयन
कुलपति के चयन के लिए एक विशेष “खोज समिति” का गठन किया जाएगा. यह समिति तीन से पांच योग्य उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल तैयार कर राज्यपाल (कुलाधिपति) और मुख्यमंत्री के पास भेजेगी. समिति के अध्यक्ष एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद होंगे, जिन्हें कुलाधिपति नामित करेंगे. समिति के अन्य सदस्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक शिक्षाविद (राज्य सरकार द्वारा नामित), यूजीसी के प्रतिनिधि और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव शामिल होंगे. यदि पैनल के नामों पर सहमति नहीं बनती है, तो समिति से नई सूची मांगी जा सकती है.

टकराव के बाद बदला गया नियुक्ति का प्रावधान
विधेयक को मंजूरी मिलने से पहले सरकार और राजभवन के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर काफी खींचतान हुई थी. शुरुआत में राज्य सरकार ने नियुक्ति का पूरा अधिकार अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया था, जिसे राज्यपाल ने विधिक राय लेने का निर्देश देते हुए वापस कर दिया था. इसके बाद बजट सत्र में संशोधित विधेयक लाया गया, जिसमें राज्यपाल और सरकार के बीच समन्वय का रास्ता निकाला गया. अब कुलाधिपति (राज्यपाल) औपचारिक नियुक्ति पत्र जारी करेंगे, लेकिन नाम के चयन में मुख्यमंत्री की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी.

छात्रों को मिलेगा मानकीकृत शिक्षा का लाभ
इस विधेयक का दूरगामी लक्ष्य राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को एक एकीकृत ढांचे के तहत लाना है. इससे पूरे राज्य में शिक्षा का पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन की प्रक्रिया एक समान होगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य के विश्वविद्यालयों की डिग्रियों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक पुस्तकालय व प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं एक समान रूप से मिल सकेंगी. साथ ही, शोध और नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए भी एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा.
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