Heart Wrenching Incident: मानवता को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात ने समाज की संवेदनहीनता और दबंगई के भयावह चेहरे को उजागर कर दिया है।
नक्सल प्रभावित गुरपा थाना क्षेत्र के हाराखुरा गांव में एक ग्रामीण डॉक्टर को महज इसलिए दरिंदों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा, क्योंकि उसने 2021 की गैंगरेप पीड़िता के घर जाकर उसकी बीमार मां का इलाज करने की जुर्रत की।
डॉक्टर जितेंद्र यादव, जो लंबे समय से ग्रामीण इलाकों में लोगों का नि:स्वार्थ इलाज करते रहे हैं, जब रेप पीड़िता के घर पहुंचे, तो वहां पहले से घात लगाए बैठे गांव के ही कुछ आरोपी पक्ष के लोग उन पर टूट पड़े। डॉक्टर को घर से घसीटकर बाहर निकाला, पास के एक पेड़ से बांधा और फिर लोहे की रॉड और लाठियों से इतनी बेरहमी से पीटा कि उनका पूरा शरीर लहूलुहान हो गया।
घटना के समय पीड़िता की नाबालिग भांजी ने इंसानियत की मिसाल कायम की। उसने डॉक्टर को बंधा और पिटते देखा, तो खुद की जान की परवाह किए बिना भागकर मुख्य सड़क पर पहुंची। संयोगवश, उसी समय डायल 112 की पुलिस गाड़ी गश्त पर थी। बच्ची ने चीखते हुए पुलिस से मदद मांगी। पुलिस जब गांव पहुंची तो आरोपी भाग निकले, और डॉक्टर जितेंद्र को मुक्त कराया गया।
गंभीर रूप से घायल डॉक्टर को पहले फतेहपुर सीएचसी और फिर मगध मेडिकल कॉलेज, गया रेफर किया गया है। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। शरीर पर कई जगह गंभीर चोटें हैं, और मानसिक सदमा भी साफ देखा जा रहा है।
पीड़िता की मां ने बताया कि गांव के ही दबंगों ने उनकी बेटी के साथ वर्ष 2021 में गैंगरेप किया था। मामला कोर्ट में है और 30 मई को गवाही थी। उन्होंने कहा कि गवाही रोकने के लिए हमें लगातार धमकियां दी जा रही थीं। पहले भी दो बार मारपीट हो चुकी है, लेकिन हम झुके नहीं। अब हमारे मददगार डॉक्टर साहब को निशाना बनाया गया।
इस पूरी घटना के दौरान गांव के लोग मूकदर्शक बने रहे। किसी ने विरोध नहीं किया, न ही पुलिस को सूचना दी। सवाल उठता है कि जब समाज ही अन्याय के खिलाफ खड़ा न हो, तो इंसाफ की उम्मीद कहां से करें?
पुलिस ने घटनास्थल से कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली है और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। गुरपा थानाध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और डॉक्टर जितेंद्र पर हमले को "हत्या के प्रयास" की गंभीर धाराओं में दर्ज किया गया है।
यह घटना न केवल न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज के नैतिक पतन का भी भयानक चित्र प्रस्तुत करती है। एक डॉक्टर, जो मानवता के नाते एक पीड़ित परिवार की सेवा को गया, उसे इस तरह दंडित किया गया – यह सिर्फ डॉक्टर जितेंद्र पर हमला नहीं, बल्कि समाज की बची-खुची संवेदना पर हमला है।
अब समय आ गया है जब ऐसे अपराधियों को सख्त सजा देकर एक मिसाल कायम की जाए, ताकि कोई और जितेंद्र फिर इस तरह बर्बरता का शिकार न बने।