West Bengal News: कोलकाता पुलिस के उपायुक्त शांतनु सिन्हा और मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत कार्यों की देखरेख करने वाले लोगों के घर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी पर ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाए हैं. तारकेश्वर की चुनावी सभा में उन्होंने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा और निजी कामकाज देखने वालों को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में सवाल किया कि क्या उन्हें रास्ते से हटाकर बंगाल जीतने की कोशिश की जा रही है? मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि माकपा के शासनकाल में भी उन पर कई हमले हुए थे, लेकिन वे डिगी नहीं.
चुनावी अभियान में बाधा डालने का लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और उम्मीदवारों को प्रचार करने से रोक रही हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि टीएमसी उम्मीदवार देबाशीष कुमार को 16 घंटे तक हिरासत में रखा गया, जिससे वे चुनाव अभियान में हिस्सा नहीं ले सके. मुख्यमंत्री का कहना है कि इनकम टैक्स का काम देखने वाले कर्मियों के घर तलाशी लेकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया.
महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) पर घेरा
महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों पर ममता बनर्जी ने आंकड़ों के साथ पलटवार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस महिला आरक्षण की विरोधी नहीं है, बल्कि वह इसमें जोड़े गए “परिसीमन” के प्रावधान का विरोध कर रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि लोकसभा में टीएमसी के कुल सदस्यों में से 37.9 प्रतिशत और राज्यसभा में 46 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो देश में सबसे अधिक है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए विपक्षी राज्यों की सीटें कम करने और अपने राजनीतिक हित साधने के लिए महिलाओं को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है.
आरक्षण लागू करने में देरी और मंशा पर सवाल
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार की नीयत साफ थी, तो 2023 में बिल पास होने के बाद तीन साल तक इंतजार क्यों किया गया? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि चुनावों के बीच इसे जल्दबाजी में क्यों लाया गया और इसमें परिसीमन की शर्त क्यों जोड़ी गई? ममता बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस दशकों से महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है और वह भाजपा को चुनावी लाभ के लिए “सीट री-ऑर्गेनाइजेशन” के नाम पर राजनीतिक माहौल बदलने नहीं देगी.