Jharkhand News: वित्तीय वर्ष 2026-27 झारखंड के लिए उम्मीदों की नई लहर लेकर आया है. अप्रैल का महीना खत्म होने से पहले ही राज्य सरकार ने खनिज संपदा से 745 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व वसूल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. विभाग द्वारा 23 अप्रैल 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, मेजर और माइनर दोनों ही श्रेणियों में खनिजों के तेज डिस्पैच और प्रभावी प्रबंधन ने इस सफलता का आधार तैयार किया है. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रही डिजिटल निगरानी और सुगम नीतिगत सुधारों का लाभ अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है.
राज्य को प्राप्त कुल राजस्व में सबसे बड़ा हिस्सा मुख्य खनिजों का रहा है, जिससे सरकारी खजाने में 691.35 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा हुई है. वहीं, पत्थर और बालू जैसे लघु खनिजों ने भी राजस्व के मोर्चे पर अपना योगदान देते हुए 54.51 करोड़ रुपये का संग्रह किया है. राजस्व के साथ-साथ खनिजों के परिवहन की रफ्तार भी चौंकाने वाली रही है. अप्रैल के शुरुआती तीन हफ्तों में ही मुख्य खनिजों का 1 करोड़ 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक और लघु खनिजों का लगभग 34 लाख मीट्रिक टन डिस्पैच सुनिश्चित किया गया है.
इतने बड़े पैमाने पर खनिजों की पारदर्शी आपूर्ति यह दर्शाती है कि राज्य में खनन और परिवहन की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक हाईटेक हो गई है. ई-चालान सिस्टम और सख्त निगरानी ने राजस्व चोरी पर लगाम कसी है, जिसका सीधा लाभ सरकारी तिजोरी को मिल रहा है. जानकारों का मानना है कि यदि राजस्व संग्रह की यही रफ्तार पूरे साल बरकरार रही, तो झारखंड इस वित्तीय वर्ष के अंत तक अपने पुराने सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर सकता है.
वित्तीय वर्ष की इस धमाकेदार शुरुआत से राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है. प्राप्त राजस्व का बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश किया जा सकेगा. विभाग अब आने वाले महीनों में नए खनन पट्टों की नीलामी की तैयारी कर रहा है, जिससे राजस्व के इन आंकड़ों में और भी बड़े उछाल की संभावना जताई जा रही है. कुल मिलाकर, झारखंड का खनिज क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत बूस्टर डोज साबित हो रहा है.