Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-04-25

Chandil News: ईचागढ़ में हाथी का तांडव, मां-बेटी की दर्दनाक मौत, दो बुजुर्ग घायल

Chandil: चांडिल अनुमंडल के ईचागढ़ प्रखंड स्थित हाड़ात गांव में शनिवार तड़के उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक जंगली हाथी ने गांव में घुसकर एक घर पर हमला कर दिया। रात करीब 3 बजे हुए इस हमले ने एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। हाथी के हमले में 36 वर्षीय चाइना देवी और उनकी 13 वर्षीय बेटी अमिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के दो बुजुर्ग सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में डर और सन्नाटा पसर गया है।

दो बुजुर्ग घायल, अस्पताल में चल रहा इलाज
हमले में परिवार के मुखिया 72 वर्षीय मोहनलाल महतो और 70 वर्षीय सांतुला देवी बुरी तरह घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इधर, मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया है। 

वन विभाग और पुलिस पहुंची मौके पर, तत्काल राहत की घोषणा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को संभालने में जुट गई। वन विभाग के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता दी है। साथ ही यह भी बताया गया है कि आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक मृतक के परिवार को 3 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर नजर रखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है।

हर साल दोहराई जाती है त्रासदी, समाधान अब भी अधूरा
ईचागढ़-चांडिल क्षेत्र में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है। हर साल ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें लोगों की जान जाती है, फसलें बर्बाद होती हैं और घर टूट जाते हैं। बावजूद इसके अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की कटाई और हाथियों के कॉरिडोर खत्म होने के कारण ये जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में केवल मुआवजा देकर समस्या को खत्म नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों की मांग ठोस नीति बने, सिर्फ राहत से नहीं होगा समाधान
स्थानीय लोगों का कहना है कि 50 हजार की तत्काल सहायता से खोई हुई जानें वापस नहीं आ सकतीं। गांव के लोग रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं, लेकिन हाथियों का खतरा कम नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि रात में अकेले बाहर न निकलें और हाथी दिखने पर तुरंत सूचना दें।
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !